प्रदेश के नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2013 में कामधेनु और मिनी कामधेनु योजना शुरू की गई लेकिन बैंकों की हीलाहवाली में लाभार्थी पिस रहे हैं।
इसका परिणाम है कि जिले में इस दोनों योजना के तहत चयनित 35 में से मात्र तीन लाभार्थियों को ही सफलता मिली सकी। बैंक प्रक्रिया की धीमी गति के चलते लोगों का इस योजना से मोह भंग हो रहा है।
बताते चले कि कामधेनु योजना का प्रोजेक्ट एक करोड़ 20 लाख 51 हजार 220 रुपये का है। इसमें लाभार्थी द्वारा प्रोजेक्ट का 25 प्रतिशत राशि बैंक में जमा करनी है और 75 प्रतिशत राशि बैंक द्वारा ऋण के रूप में मिलेगा। इन पैसों से लाभार्थी 100 दुधारू पशुओं का पालन कर रोजगार शुरू कर सकता है।
इसी क्रम में, मिनी कामधेनु योजना का प्रोजेक्ट कास्ट 52 लाख 35 हजार रुपये का है। इसके तहत लाभार्थी को 50 दुधारू पशुओं का पालन करना होता है। इन योजनाओं के लाभार्थियों को पांच वर्ष तक बैंक का ब्याज नहीं देना है।
इस योजना के तहत लाभार्थियों का चयन जिला स्तर पर होता हैं। इसके अध्यक्ष मुख्य विकास अधिकारी हैं। कामधेनु योजना के लिए लाभार्थी के पास दो एकड़ और मिनी कामधेनु योजना के लाभार्थी के एक एकड़ भूमि का होना आवश्यक है।
इस क्रम में, कामधेनु योजना के तहत जिले से वर्ष 2013-14 में एक और 2014-15 के लिए चार लाभार्थियों का चयन किया गया। इनमें से दो लाभार्थियों का ऋण बैंक द्वारा स्वीकृत हो चुका है, जबकि तीन लाभार्थियों का ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया में है।
वहीं, मिनी कामधेनु योजना के तहत वर्ष 2014-15 में 30 लाभार्थियों का चयन किया गया लेकिन इनमें से सिर्फ एक ही लाभार्थी के ऋण को बैंक द्वारा स्वीकृत किया गया है। बैंकों द्वारा मांगें जा रहे अभिलेखों से लाभार्थियों के पसीने छूट रहे हैं।
हमें जो लक्ष्य मिला था, हमने लाभार्थियों का चयन कर लक्ष्य को पूरा कर लिया है लेकिन बैंक द्वारा लाभार्थियों से मांगें जा रहे अभिलेखों को लेकर परेशानी हो रही है, जिसके कारण लाभार्थियों का ऋण स्वीकृत होने में देरी हो रही है। इस संबंध में डीएम द्वारा बैठकों में बैंक के अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं। - डा. एमएम त्रिपाठी, योजना के नोडल अधिकारी