संदीप सौरभ सिंह
बूढ़नपुर में तहसील के भीलमपुर छपरा में 20 साल से लापता व्यक्ति के नाम पर फर्जी आदमी को खड़ा कर 96 लाख का मुआवजा हड़पने के मामले में फर्जीवाड़े में शामिल विशेष भूमि अध्यप्ति कार्यालय के अमीन योगेंद्र सिंह पर गाज गिर गई है। जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त एवं राजस्व की रिपोर्ट पर उसे निलंबित कर दिया है। निलंबन के बाद योगेंद्र पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है। वहीं, अन्य कार्रावाई के लिए सीआरओ से आरोप-पत्र के साथ ही पूरी रिपोर्ट तलब की गई है।
बूढ़नपुर में तहसील के भीलमपुर छपरा में 20 साल से लापता सुग्रीव के नाम पर फर्जी आदमी को खड़ा कर हवाई में आई जमीन का 96 लाख रुपये की मुआवजा हड़पने की मुद्दा अमर उजाला ने ही उठाया था। मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्य राजस्व अधिकारी ने सुग्रीव के नाम पर जारी होने वाली 48 लाख की एक और पेमेंट को रोक दिया था। विशेष भूमि अध्यप्ति कार्यालय के अमीन योगेंद्र सिंह ने मामले में शहर कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
वहीं जिलाधिकारी ने योगेंद्र सिंह को शिकायत प्रकोष्ट के साथ अटैच कर दिया था। पुलिस ने पिछले दिनों दो दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। चार आरोपी फरार बताए गए थे। गिरफ्तार आरोपी परशुराम (जिसने सुग्रीव बनकर मुआवजा दिया था) ने बताया था कि इस फर्जीवाड़े में विशेष भूमि अध्यप्ति कार्यालय के अमीन योगेंद्र सिंह भी शामिल था। इसके साथ परशुराम ने मामले में एक एसडीएम की भी भूमिका का उल्लेख किया था।
उधर जिलाधिकारी सीबी सिंह ने एडीएम वित्त एवं राजस्व से मामले की गोपनीय जांच कराई थी। पिछले दिनों एडीएम ने इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी थी। फर्जीवाड़े में मुख्य रूप से योगेंद्र सिंह की भूमिका मिली थी। जिलाधिकारी ने रिपोर्ट के आधार पर योगेंद्र सिंह सस्पेंड कर दिया है। निलंबन के साथ ही योगेंद्र सिंह पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटकने लगी है।
पूर्व में भी हो चुका है निलंबन
आजमगढ़। वाराणसी-लुंबिनी नेशनल हाईवे के गजट के दौरान ही योगेंद्र सिंह पर रिश्तेदारों के नाम पर जमीन का बैनामा करा मुआवजा लेने संबंधी गंभीर आरोप लगे थे। तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसे निलंबित भी किया था। साथ ही एफआईआर भी हुई थी। लेकिन योगेंद्र सिंह को हाइकोर्ट से इस पर स्टे मिल गया। पुलिस भी मामले में एफआर लगा चुकी है। मामले की जांच उस समय तत्कालीन एडीएम प्रशासन प्रेम प्रकाश को सौंपी गई थी। जांच में योगेंद्र सिंह को दोषी भी बताया गया था, लेकिन विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय में फाइल ही दबा ली गई। इससे इस पर आगे कार्रवाई नहीं हो सकी।
और भी कर्रवाई संभावित
आजमग़। जिलाधिकारी ने मुख्य राजस्व अधिकारी से योगेंद्र सिंह की पिछली जांच रिपोर्ट भी तलब की है। दोनों मामले में उसके खिलाफ आरोप तैयार करने को कहा गया है। जांच में आरोप पुष्ट होने पर योगेंद्र सिंह पर और भी कार्रवाई संभावित है।
लेखपाल और तहसीलदार ने हस्ताक्षर को बताया फर्जी
आजमगढ़। हाईवे में जमीन आने के बाद किसान को मुआवजा देने से पहले उसकी पूरी जांच कर पत्रावली तैयार की जाती है। तहसील से इसका वैरीफिकेशन भी कराया जाता है। सुग्रीव प्रकरण की जांच शुरू की गई तो पता फाइल पर को प्रमाड़ित करने वाले लेखपाल और तहसीलदार ने अपने हस्ताक्षर को फर्जी बताया। इससे योगेंद्र सिंह की गर्दन पर शिकंजा और कस गया था। ये स्पष्ट हो गया था कि पूरा फर्जीवाड़ा उसकी ओर से सुनियोजित तरीके से किया गया था।
96 लाख के मुआवजे के फर्जीवाड़े में विभागीय संलिप्तता की एडीएम वित्त एवं राजस्व से जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में योगेंद्र सिांह की संलिप्तता सामने आई है। लेखपाल और तहसीलदार ने अपने हस्ताक्षर को फर्जी बताया है। योगेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पिछले मामले में भी उसकी फाइल तलब की गई है। आरोप पुष्ट होने पर उसके खिलाफ और कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अपनी जांच कर रही है। जरूरत पड़ी तो गिरफ्तारी भी होगी। -सीबी सिंह, जिलाधिकारी