स्मार्टफोन की चकाचौंध और सोशल मीडिया रील्स की दुनिया से हटकर जिले के युवा तेजी से साहित्य की ओर बढ़ रहे हैं। शहर के राहुल सांकृत्यायन राजकीय जिला पुस्तकालय में महान लेखकों और विचारकों की 27,000 से अधिक पुस्तकें युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
इंटरनेट और डिजिटल युग के प्रभाव के बावजूद छपी हुई किताबों को पढ़ने से जो गहराई और मानसिक शांति मिलती है, वह डिजिटल स्क्रीन पर दुर्लभ होती जा रही है।
वर्ष 1985 में स्थापित इस पुस्तकालय का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के युवाओं और छात्रों में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शांत एवं समृद्ध माहौल उपलब्ध कराना था।
मोबाइल आने के बाद पुस्तकालय में छात्रों की संख्या काफी कम हो गई थी। युवा मोबाइल पर ही तैयारी करने लगे थे। कोरोना काल के बाद इसमें और गिरावट आ गई थी। प्रतिदिन 30 से 35 छात्र ही पुस्तकालय में अध्ययन के लिए पहुंचते थे लेकिन विगत डेढ़ वर्षों में पुस्तकालय में काफी सुधार हुआ है।
छात्रों के बैठने के लिए कुर्सियों आदि की व्यवस्था की गई। ऑनलाइन कक्षाओं के लिए चार कंप्यूटर भी लगाए गए। पुस्तकालय को आधुनिक सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया गया।
इसका परिणाम यह है कि अब प्रतिदिन 70 से 75 छात्र यहां अध्ययन के लिए पहुंच रहे हैं। इस पुस्तकालय में देश के 80 नामी-गिरामी लेखकों की 27,000 से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। इस पुस्तकालय का पंजीकरण शुल्क 300 रुपये वार्षिक है।
000
पुस्तकालय पर एक नजर
विवरण
जानकारी
शुभारंभ
1985
बैठने की क्षमता
80 विद्यार्थी
किताबों की संख्या
27,000
प्रतिदिन आते हैं
70 से 75 छात्र
पंजीकृत छात्र
667
000
मोबाइल की लत के बीच छात्रों की बढ़ती संख्या सुखद
पुस्तकालयाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश राय ने बताया कि आज युवा पीढ़ी का इंटरनेट और मोबाइल की ओर बढ़ता झुकाव चिंता का विषय है। जबकि किताबों से पढ़ना अधिक बेहतर होता है। मोबाइल से पढ़ते समय भटकाव अधिक होता है, क्योंकि पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्मों से संदेश और नोटिफिकेशन आते ही ध्यान तुरंत उधर चला जाता है। आजकल बच्चों में बचपन से ही मोबाइल के प्रति आकर्षण बढ़ गया है। छोटे बच्चों के हाथ में भी माता-पिता फोन दे देते हैं, जिससे वे मोबाइल से अधिक जुड़ गए हैं और किताबों को उतनी प्राथमिकता नहीं दे पा रहे हैं। इसके बावजूद लाइब्रेरी प्रतिदिन छात्रों से गुलजार रहती है, जिसे देखकर सुखद एहसास होता है।
00
डिजिटल लाइब्रेरी के लिए भेजा गया प्रस्ताव
पुस्तकालयाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश राय ने बताया कि आधुनिक युग में जिस प्रकार ऑनलाइन पढ़ाई का चलन बढ़ा है, उसे देखते हुए डिजिटल लाइब्रेरी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। यह लाइब्रेरी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में बनाई जानी है। उम्मीद है कि अगले साल तक डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी विद्यार्थियों को मिलने लगेगी।
00
जिले के लेखकों के साथ ही डीएम पर लिखी पुस्तकें भी मौजूद
लेखक
पुस्तकें
राहुल सांकृत्यायन 40
अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध 30
अल्लामा शिब्ली नोमानी
15
डॉ. कन्हैया सिंह
20
डीएम रविंद्र कुमार
02
00
रिटायर्ड शिक्षकों और अधिकारियों से काउंसिलिंग की तैयारी
पुस्तकालयाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश राय ने बताया कि रिटायर्ड शिक्षकों की तलाश की जा रही है, जो लाइब्रेरी में आकर बच्चों की करियर काउंसिलिंग कर सकें। इसके लिए सीडीओ से भी वार्ता हुई है। उन्होंने भी छात्रों की करियर काउंसिलिंग के लिए आने की सहमति जताई है।
00
बोले छात्र
भले ही मोबाइल और कंप्यूटर आ गए हैं, लेकिन किताबों से तैयारी करने और पढ़ाई करने का एक अलग ही आनंद है। बहुत-सी बातें, जो हमें किताबों में मिलती हैं, वे गूगल पर नहीं मिल पातीं। -अंशिका सरोज।
किताबों की बात ही निराली है। मोबाइल भी ठीक है, लेकिन तैयारी की दृष्टि से किताबों की बात ही अलग है। इसके अलावा लाइब्रेरी में हमें अखबार और पत्रिकाएं भी मिल जाती हैं। -नैंसी वर्मा।
मोबाइल से हम अकेले पढ़ते हैं, जबकि यहां आने के बाद किसी विषय पर आपस में चर्चा भी कर सकते हैं। मोबाइल और लैपटॉप पर हम सिर्फ पढ़ सकते हैं। -घनश्याम यादव।
लाइब्रेरी में हमें सभी सुविधाएं मिलती हैं। यदि किसी पुस्तक की जरूरत होती है तो वह पुस्तक घर ले जाने के लिए भी मिल जाती है, जिसे पढ़ने के बाद वापस कर देते हैं। -राकेश गौतम।