फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी दानपत्र का आरोप: मदरसे की मान्यता निलंबित करने पर रोक, जवाब दाखिल करने के आदेश; चार सप्ताह का अल्टीमेटम

Sat, 10 Oct 2026 05:56 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

आजमगढ़ में फर्जी दानपत्र के आरोप में मदरसे की मान्यता निलंबित किए जाने के मामले में अदालत ने रोक लगा दी है। न्यायालय ने मामले में विपक्षी पक्ष को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा। मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कथित फर्जी दानपत्र के आधार पर मान्यता हासिल करने के आरोप में मदरसा जामिया नुरूल उलूम मुबारकपुर की मान्यता निलंबित किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रजिस्ट्रार, मदरसा शिक्षा परिषद के 20 अगस्त के आदेश के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने विपक्षी पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

विज्ञापन


बता दें कि शिकायतकर्ता हाजी इमाम अली की ओर से मदरसा शिक्षा परिषद, लखनऊ में की गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मदरसा जामिया नुरूल उलूम मुबारकपुर की मान्यता कथित फर्जी दानपत्र के आधार पर ली गई है। 

Trending Videos

रिट याचिका दाखिल की थी

शिकायत पर मदरसे के प्रबंधक जहीन अहमद की ओर से प्रस्तुत जवाब को संतोषजनक नहीं मानते हुए रजिस्ट्रार, मदरसा शिक्षा परिषद ने 20 अगस्त को मदरसे की मान्यता निलंबित कर दी थी। इसके बाद प्रबंध समिति के तत्कालीन और वर्तमान सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश भी दिया गया था। इस मामले में प्रबंध समिति के ऊपर प्राथमिकी भी दर्ज की जा चुकी है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

निलंबन आदेश के खिलाफ मदरसे के प्रबंधक जहीन अहमद ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में रिट याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया कि रजिस्ट्रार द्वारा किसी मदरसे की मान्यता केवल दो परिस्थितियों में निलंबित की जा सकती है। पहली, जब मान्यता की शर्तों का अनुपालन न किया गया हो और दूसरी, जब मदरसा बोर्ड के आदेश का अनुपालन न किया गया हो।
विज्ञापन

कोई अंतिम टिप्पणी अभी नहीं

प्रबंध समिति की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वर्ष 2010 में जब मदरसे को अनुदान पर लेने की प्रक्रिया चल रही थी, उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी ने मदरसे का भौतिक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद ही मदरसे को अनुदान पर लिए जाने की संस्तुति की गई थी। अधिवक्ता का तर्क था कि इसके बावजूद वर्तमान में बिना किसी स्थलीय निरीक्षण के मान्यता निलंबित कर दी गई।

फर्जी दानपत्र के आरोप पर अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि दानपत्र वैध है या अवैध, इस पर बाद में विचार किया जाएगा। मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार ने रजिस्ट्रार मदरसा परिषद के 20 अगस्त के निलंबन आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। अदालत ने विपक्षी को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें