शिब्ली नेशनल पीजी कालेज और दारुल मुसन्नफीन के संस्थापक अल्लामा शिब्ली नोमानी के वफात को शिब्ली डे के रूप में मनाया गया। बुधवार सुबह शिब्ली एकेडमी में कुरआनख्वानी हुई। इसके बाद शिब्ली नेशनल कालेज के सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन की तिलावत के बाद हुआ।
मुख्य अतिथि शिब्ली नेशनल पीजी कालेज के प्रबंध समिति के अध्यक्ष रिजवान फारुकी ने कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी की दी हुई तालिम पर अमल करते हुए उनके ख्वाबों को पूरा करना ही उनके लिए सच्ची खिराजे अकीदत होगी। कहा कि अल्लाम कौम के लोगों की शिक्षा के प्रति काफी चिंतित रहा करते थे। यही वजह थी उन्होंने शिब्ली कालेज और दारुल मुसन्नफीन की बुनियाद डाली।
वह एक ऐसे महान शिक्षाविद थे कि जहां-जहां गए अपनी विद्वता की छाप छोड़ी। कार्यक्रम का संचालन कर रहे उर्दू विभागाध्यक्ष डा. शबाबुद्दीन ने कहा कि जब देश अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था तो अल्लाम शिब्ली ने देश की एकता अखंडता को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका मानना था कि जब तक लोग शिक्षित नहीं होंगे तब तक अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति नहीं मिलेगी।
यही कारण था कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया। गोष्ठी को प्रबंधक नियाज अहमद जमाली एडवोकेट, मिर्जा महफूज बेग, छात्रा एरम फातमा, मोहम्मद नाजिम ने भी संबोधित किया। इस मौके पर शिब्ली कालेज के प्राचार्य गयास असद, शहबाज सिद्दीकी, डा. ताहिर, अहमद इम्तेयाज, नोमान अहमद, डा. तारिक उस्मानी, डा. सआदुज्जफर जीमी, शिब्ली इंटर कालेज के प्रधानाचार्य सुहेल अहमद आदि मौजूद रहे।