जिले में खाद्य वस्तुओं में बड़े पैमाने पर मिलावट की जा रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम की ओर से छह महीनों में की गई कार्रवाई में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से जांच के लिए 113 नमूने लिए गए थे। इन नमूनों को जांच में 70 नमूने फेल हुए और केस दर्ज किए गए। इनमें से 68 लोगों से जुर्माने की वसूली की गई। दीपावली नजदीक आने पर खाद्य वस्तुओं में मिलावट का दौर शुरू हो गया है।
जनपद में बहुत तेजी से मिलावट का धंधा चल रहा है। इस धंधे से जहां मिलावट का कारोबार करने वाले मालामाल हो रहे हैं। वहीं लोगों की सेहत पतली हो रही है लेकिन मिलावटखोरों का लोगों की सेहत से कोई लेनादेना नहीं है। उन्हें तो मतलब है अपनी जेबें भरने में।
त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है और दुकानों पर मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार है। अप्रैल 2016 से लेकर सितंबर माह तक खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में 843 निरीक्षण किए। टीम ने 106 स्थानों पर छापामारी की।
टीम के सदस्यों ने विभिन्न दूकानों से खोवा, छेना, लड्डू, सोनपापड़ी, बेसन, कोल्ड ड्रिंक, दूध, पनीर, पान मसाला आदि के 113 नमूने लिए, जिन्हें जांच के लिए लैब में भेजा। इस दौरान 70 नमूने फेल हुए। जिनके मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। इनमें 68 लोगों से आठ लाख 53 हजार रुपये जुमार्ना वसूला गया।
ग्राहक क्या ज्यादातर खाद्य पदार्थों में हम भी मिलावट को नहीं समझ पाते। बहुत से सामान ऐसे होते हैं, जिन्हें देखकर ही उनमें मिलावट होने का पता चल जाता है। इसके लिए हम सामान के नमूने लेकर जांच के लैब भेजते हैं वहां से रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाती है। - अभय कुमार, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी