भारतीय जननाट्य संघ (इप्टा) के दो दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन का समापन रविवार को हो गया। जोकहरा के रामानंद सरस्वती पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम के अंतिम दिन सांस्कृतिक राष्ट्रवाद बनाम समता मूलक समाज पर हुई संगोष्ठी में वरिष्ठ लेखक इरफान इंजीनियर ने कहा कि आज जो फासीवाद का आधार है, उसमें ज्यादा ताकत नहीं है बल्कि दिखावा है। बाबा साहब अंबेडकर समतामूलक समाज के समर्थक थे। जाति, भेदभाव के अंतर को खत्म करने के लिए लड़ाई लड़े।
उन्होंने कहा कि भारत में जाति व्यवस्था से समाज को बचाना है। जब तक जातिवाद खत्म नहीं होगा भारत एक समृद्ध राष्ट्र नहीं हो सकता। क्योंकि भारत में ब्राह्मणवादी व्यवस्था हावी है। भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के शोषितों, दलितों के दर्द का निवारण करना है। प्रो. अली जावेद ने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का खतरा हमारे ऊपर आ गया है। वर्तमान सरकार आजादी और जम्हूरियत का नारा लगाकर, हमारे ऊपर खतरे पैदा कर रही है।
कोई भी निर्माण बहुत मेहनत से होता है लेकिन उसमें मामूली बम लगाकर उसको एक मिनट में नष्ट किया जा सकता है। जेएनयू हमको कई मार्ग देता है। फासीवाद के खिलाफ कन्हैया ने आवाज उठाई लेकिन कन्हैया के साथ सरकार ने गलत व्यवहार किया। जयप्रकाश धूमकेतु ने कहा कि शत्रु को परास्त करने के लिए आदमी अपने हर औजारों को तराशता है। उसके बाद उसको लेकर जाता है। 15 अगस्त 1947 के पहले कौन से औजार थे और इस समय हमारे पास कौन से औजार है।
विनीत तिवारी ने कहा कि मजहब और जातियों के नाम पर लोगों को लड़वाना ठीक नहीं है। अध्यक्षता कर रहे विभूति नारायण राय ने कहा कि सारी चीजें मिलकर एक संस्कृति होती हैं। हमारे देश में अनेकता में एकता है। अंग्रेज यहां आए और हमारे संस्कृति को नष्ट किया। पूरे देश में एक जैसा कानून बने, जिससे सबको न्याय मिल सके। इस अवसर पर लखनऊ, रायबरेली, बस्ती, उरई, गोरखपुर इप्टा की टीमों ने जनवादी गीत और नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति दी। इप्टा के अध्यक्ष राकेश, ओपी नदीम, ओपी अवस्थी, संतोष डे, प्रदीप घोष, मुख्तार अहमद, दिलीप रघुवंशी, शहजाद रिजवी, स्वातिराकज, मुमताज खां, मो. नईम, डी सोम, हरिमंदिर पांडेय मौजूद रहे। संस्था की निदेशिका हिना देसाई ने आभार प्रकट किया।