मऊ। चालू कैलेंडर वर्ष में जिले भर में सिर्फ चार आवेदकों को ही असलहे का लाइसेंस मिल पाया है। जबकि 1095 लोगों ने आवेदन किया था। पिछले साल की अपेक्षा इस साल में असलहे के लिए लाइसेंस का आवेदन करने वालों की संख्या जिले में बढ़ी है। आवेदनकर्ता कलेक्ट्रेट का निरंतर चक्कर काट रहे हैं। सरकारी कार्यप्रणाली कुछ ऐसी है कि विभागीय औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद चालू साल तो क्या। लगता है आने वाले नए साल में भी आवेदनकर्ताओं को असलहाधारी बनने के लिए लंबा इंतजार करना होगा।
जिले में वर्ष 2011 में 917 लोगों ने असलहे के लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। इसके अनुक्रम में 137 लोगों को जिलाधिकारी द्वारा लाइसेंस जारी किया गया था। वहीं चालू कैलेंडर वर्ष 2012 में 15 दिसंबर तक जिले भर से असलहे के लाइसेंस के लिए 1095 आवेदन असलहा बाबू के पास एकत्र हुए हैं। लेकिन हालत यह है कि साल बीतने में मात्र 15 दिन शेष हैं और अब तक सिर्फ चार लोगों को ही असलहे का लाइसेंस मिल पाया है। जबकि शासन द्वारा तय मियाद के अनुसार आवेदन की तिथि से तीन माह के भीतर आवेदक की आवश्यकता, चरित्र समेत अन्य जांच संबंधी सारी औपचारिकताओं को पूरा कर असलहे का लाइसेंस दे देना चाहिए। लेकिन इसके लिए जिम्मेदार सरकारी मुलाजिमों का कहना है कि पहले विधानसभा चुनाव उसके बाद नगर पालिका चुनाव हुए। जिस वजह से इस ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं जा पाया। साथ ही जांच संबंधी विभिन्न औपचारिकताएं भी नहीं पूरी हो पाई। इसके बाद जिलाधिकारी का स्थानांतरण होने से नए जिलाधिकारी के आने के बाद उन तक फाइलें नहीं पहुंच पाई। जिलाधिकारी भूपेंद्र एस चौधरी ने बताया कि असलहे का लाइसेंस आवेदक की आवश्यकता के आधार पर और समस्त प्रकार की पुलिस-प्रशासनिक जांचों के उपरांत ही दिया जाता है। इसमें कभी-कभी समय भी लगता है। हालांकि अब प्रक्रिया पुन: आरंभ की जाएगी। आवश्यकताओं को परख कर और जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
प्रति ग्राम पंचायत दस असलहे हैं जिले में
मऊ। जिले भर में वर्तमान में लगभग छह हजार लोगों के पास असलहे के लाइसेंस है। जिनमें 5200 के लगभग लाइसेंस अब तक जिले से निर्गत किए गए हैं। जबकि 800 के लगभग लाइसेंस गैर जनपदों से जारी हैं। वहीं जिले में 598 ग्राम पंचायतें हैं। इस आधार पर असलहों और ग्राम पंचायतों की संख्या देखी जाए तो एक ग्राम पंचायत में दस असलहे वर्तमान समय में मौजूद हैं।