आजमगढ़। आजमगढ़ विकास प्राधिकरण के गठन हुए चार साल हो गए, मगर प्राधिकरण मानचित्र जारी करने तक ही सिमट कर रह गया है। जबकि प्राधिकरण के नियमों के अनदेखी कर नदी से लेकर बंधे और रोड की शोभा अवैध रूप से बनी अट्टालिकाएं बढ़ा रही हैं। प्राधिकरण के गठन के बाद से लगभग 519 भवन रातोंरात अवैध रूप से खड़ा कर दिए गए। प्राधिकरण की नोटिस मिलने के बाद भी अवैध निर्माण जारी है।
बता दें कि वर्ष 2008-09 से पूर्व आजमगढ़ नगर विनियमित क्षेत्र में आता था। जून 2009 में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन होने पर शहर किनारे के पश्चिम भदुली, दक्षिण चंडेश्वर, उत्तर मनचोभा और कम्हेनपुर तक के लगभग 159 गांव भी दायरे में आ गए। इन गांवों के प्राधिकरण के दायरे में आते ही प्रस्तावित भूमि को आवासीय, केंद्रीय क्रियाएं उद्योग, कृषि मंडी, बस अड्डा, यातायात, सड़क, सेतु, पार्किंग के लिए चिह्नित किया गया, जहां आवासीय भवन मानचित्र पास कराने पर ही बनाए जा सकते हैं। प्राधिकरण जद में आए गांव तो दूर शहर के अंदर प्राधिकरण के नियम कानून की अनदेखी कर कहीं बंधे पर अवैध निर्माण हो रहा है, तो कहीं पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र नदी और नालों पर भी अवैध रूप से भवन खड़े किए जा रहे हैं। यहीं नहीं रोडवेज बाईपास, नरौली, एलवल बंधा, डीएवी बंधे की जमीनों की शोभा अवैध रूप से बने भवन बढ़ा रहे हैं। प्राधिकरण से अब तक वर्ष 2009 में 79, वर्ष 2010 में 229, वर्ष 2011 में 217 और वर्ष 2012 में 94 मकान अवैध रूप से चिह्नित किए गए।