लाटघाट। बारिश से तीसरे दिन शुक्रवार को घाघरा नदी नौ सेमी. और उफनने के बाद स्थिर हो गई है। बदरहुआ और डिघिया गेज पर नदी खतरे के निशान से पांच से 33 सेमी. ऊपर बह रही है। बाढ़ से महुआ-गढ़वल बांध के उत्तर लगभग 50 गांवों की आबादी पूरी तरह घिर गई है। इधर, तटवर्ती चक्की गांव में पायलिंग के बाद भी कटान तेज हो जाने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मची है।
बता दें गुरुवार की शाम चार बजे तक घाघरा नदी डिघिया गेज पर खतरे के निशान 70.40 मीटर से 26 सेमी. ऊपर बह रही थी, शुक्रवार की सुबह आठ बजे तक सात सेमी. और वृद्धि रिकार्ड किया गया। सुबह से शाम चार बजे तक जलस्तर 70.73 मीटर पर स्थिर बना रहा। इधर बदरहुआ गेज पर गुरुवार की शाम चार बजे तक जलस्तर खतरे के निशान 71.64 मीटर से चार सेमी. नीचे था, जो शुक्रवार की सुबह आठ बजे तक सात सेमी. और बढ़ जाने से 71.68 मीटर खतरे से पांच सेमी. ऊपर पहुंच गया। शाम चार बजे तक जल स्तर 71.73 मीटर पर ही स्थिर बना रहा।
डिघिया गेज के बाद बदरहुआ गेज पर भी जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाने से चक्की हाजीपुर, भदौरा मकरंद, नैनीजोर, मानिकपुर, रोशनगंज, हैदराबाद, उर्दिहा, शंकरपुर, शिवपुर, सहदेवगंज, महाजी भदौरा खास, शाहडीह, महाजी, सोनौरा, झनझनपुर, अजगरा मगरवीं, देवारा खास राजा, इस्माइलपुर, अजगरा, बेलहिया सहित लगभग 50 राजस्व गांव बाढ़ से पूरी तरह घिरे गए हैं। गांवों के संपर्क मार्ग डूब जाने से ग्रामीण मुसीबत में फंसे हुए हैं। सबसे भयावह स्थिति नदी के तटवर्ती चक्की गांव की है। उफनाई घाघरा की धारा और तेज हो जाने से पायलिंग किए जाने के बाद भी कटान जारी रहने से ग्रामीण दहशत में हैं। एसडीएम सगड़ी रामनरेश पाठक ने बताया कि बाढ़ से घिरे चक्की और देवारा खास राजा गांव में लोगों को बाजार आदि आनेजाने के लिए 11 सरकारी नाव की व्यवस्था की गई है। कटान रोकने के लिए पायलिंग का कार्य भी जारी है।