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दस साल में पुलिस हिरासत में राकेश की छठवीं मौत

Sat, 15 Mar 2014 05:30 AM IST
Azamgarh
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आजमगढ़। जिले में पुलिस उत्पीड़न को लेकर सिधारी, रानी की सराय, गंभीरपुर थाने का रिकार्ड दागदार रहा ही, शुक्रवार को जीयनपुर कोतवाली के हिरासत में एक युवक की मौत के बाद यहां भी दाग लग गया। यहीं नहीं, पुलिस इस राज को पचाने में भी जुटी रही, लेकिन शाम होते-होते घटना की जानकारी होने के बाद लोगों का गुस्सा सड़क पर आ गया। पुलिस ने लाठी भांजकर भगा दिया। इसके बाद सभी के मुंह पर ताला लग गया।
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पुलिस हिरासत में मौत का पहला वाकया फरवरी 2003 में प्रकाश में आया। जब रानी की सराय थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष ने चोरी के मामले में मेंहनगर क्षेत्र के विजईपुर गांव निवासी बासदेव यादव और उनके पुत्र को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान बासदेव यादव की हालत खराब हुई तो उन्हें हवालात के बाहर कर दिया। कुछ देर बाद बासदेव की मौत हो गई। परिवार के लोगों का आरोप लगाया था कि पुलिस द्वारा बेरहमी से पिटाई में बासदेव की मौत हुई है। जबकि पुलिस की दलील थी कि बासदेव की हृदय गति रुक जाने से जान गई थी। यह मामला बीते अभी महीना भर नहीं हुआ कि 30 मार्च 2003 की रात हिरासत में लिए गए मेहनगर थाना क्षेत्र के दौलतपुर गांव निवासी हरिलाल यादव की पुलिस द्वारा चली गोली से थाना परिसर में मौत हो गई। हरिलाल पर जीप की बैट्री चुराने का आरोप था। यहां परिवार वालों ने बताया कि पुलिस ने सर्विस रिवाल्वर से गोली मार हरिलाल की हत्या की है। मामले में आरोपी दारोगा एनबी सिंह ने दो जनवरी 2010 को सरायमीर थाना परिसर स्थित आवास के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। तीसरी मौत की घटना सिधारी थाने में घटी। यहां हिरासत में लिए गए युवक की पानी में डूबने से मौत हुई थी। युवक रानी की सराय थाने के तमौली गांव का निवासी था। मौत के बाद उसके परिवार के सदस्य और अन्य शुभचिंतकों ने जमकर हंगामा किया। अंत में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस हिरासत में चौथी मौत की घटना गत 14 मई 2010 को प्रकाश में आई। तमौली गांव निवासी 24 वर्षीय बृजेश यादव पुत्र मुन्नर यादव की मौत हुई। इस घटना में मृतक के पिता ने आरोप लगाया था कि पुलिस उसके पुत्र को पूछताछ के लिए रानी की सराय थाना लाई और भोजन में जहर दे दी। हालत खराब होने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराकर पुलिस भाग गई। जबकि पुलिस का कहना था कि उसकी तबियत खराब थी और उसे रानी की सराय स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां उसकी मौत हो गई। पांचवीं घटना 15 अप्रैल 2011 की है। इसमें निजामबाद थाना क्षेत्र के बढ़या गांव निवासी कमलेश सिंह पटेल की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। इस मामले में भी पुलिस प्रताड़ना से मौत का आरोप लगा। जबकि पुलिस ने कमलेश द्वारा फांसी लगाकर जान देने की सफाई दी। अब जब शुक्रवार को जीयनपुर पुलिस के हिरासत में राकेश की मौत हुई तो फिर पुलिस लाठी भांजकर मामले को दबाने में जुट गई। राकेश जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के बड़ा गांव पूना पोखर का निवासी था। उसे चोरी के प्रयास के मामले में पकड़ा गया था।

एक बारगी सहम गए थे बाजारवासी
लाटघाट। पुलिस हिरासत में राकेश की मौत की सूचना पर शुक्रवार शाम को उसके परिवार के साथ ही अन्य शुभचिंतक सड़क पर उतर आए। घटना के विरोध में जीयनपुर चौराहे पर चक्काजाम कर पुलिस प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करने लगे। तभी सीओ सगड़ी के नेतृत्व में पहुंची पुलिस जाम करने वालों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दी। लोगों को 19 जुलाई 2013 को पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की हत्या के बाद बाजार में हुई पुलिस फायरिंग की घटना की याद आ गई। परिणामस्वरूप एक मिनट समय गंवाए बिना ही बाजार के लोग मौके से फरार हो गए। साथ ही पूर्व में हुई घटना को याद कर सिहर गए थे।
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पुलिस के दमनात्मक कृत्य से दुखी थे बाजार के लोग
आजमगढ़। पुलिस हिरासत में मरा युवक राकेश दो भाइयों में छोटा था। मौत की सूचना पर उसकी मां फूलवती रोते बिलखते थाने पर पहुंची। यहां उसे काफी देर बरगलाया गया। कहा गया कि शव को मुख्यालय भेजा गया है। जबकि देर शाम सात बजे तक लाश मुख्यालय नहीं आई थी। दूसरी तरफ घटना के विरोध में जब परिवार के लोगों ने धरना दिया तो पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। पुलिस की पिटाई से घायल लोेगों ने कहा कि सीओ ने एक बार भी उनसे बात करना मुनासिब नहीं समझा, सीधे लाठी चलवा दी।

मोटर मैकेनिक था युवक, कोतवाली में मचा कोहराम
मालटारी। जीयनपुर कोतवाली के लाकअप में मरा युवक मोटर मैकेनिक था। गुरुवार रात दुकान से घर लौट रहा था। उसके खिलाफ एक व्यक्ति के घर में घुसने की शिकायत पर पुलिस ने घर लौटते समय उसे उठाकर कोतवाली में ले आई। शुक्रवार को लगभग साढ़े तीन बजे मौत होते ही परिवार वालों में कोहराम मच गया।
क्षेत्र के पूनापार बड़ेगांव निवासी स्व. जूठन चौधरी के दो पुत्रों में सबसे बड़ा राजकुमार कोलकाता में किसी प्राइवेट कंपनी में काम करता है। घर पर विधवा मां फूलमती के साथ छोटा बेटा राकेश (25) रहता था। राकेश की शादी हो चुकी थी। उसकी पत्नी मायके में रहती है। राकेश इमिलिया बाजार में एक दुकान पर मोटर बनाता था। गुरुवार की रात में राकेश के घर न लौटने पर शुक्रवार की सुबह परिवार वालों को राकेश के कोतवाली में बंद होने की सूचना मिली। दोपहर में राकेश की मां और भाभी मंजू खाना लेकर कोतवाली पहुंची। भोजन कराने के लगभग दो घंटे बाद राकेश की मौत होते ही मां और भाभी रोते-रोते बेहाल हो गईं। मां फूलमती का कहना है कि जिस व्यक्ति के कहने पर पुलिस ने उसके बेटे को उठाया था, उसी व्यक्ति ने बाद में कोतवाली में आकर छोड़ने के लिए भी कहा था। इसके बाद भी पुलिस ने उसके बेटे को छोड़ा नहीं। समाचार लिखे जाने तक सैकड़ों ग्रामीण मुआवजे की मांग को लेकर कोतवाली पर अड़े रहे।
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