मेजवां। हजरत इमाम हुसैन की याद इंसानियत का सरमाया और आदमियत व शराफत की दलील है। इमाम हुसैन ने कुरबानी देकर इस्लाम को बचाया है। हर इंसान को अपनी आखिरत बनाना चाहिए। मौत बरहक है। यह बातें गुरुवार को फूलपुर तहसील क्षेत्र के मेजवां गांव में आयोजित मजलिस के दौरान इमामे जुमा चमावां मौलाना वसी मोहम्मद खान किबला ने कही। उन्होंने कहा कि इंसान को नेक दिल बनना चाहिए। नेकी करने वाला इंसान सबसे आला दर्जे का होता है। हमें अल्लाह की बारगाह में चलकर हर एक काम को अंजाम देना चाहिए। जनाबे जैनब ने ही पूरी दुनिया को यह बतलाया कि करबला में हजरत इमाम हुसैन का कुरबानी देने का क्या मतलब था। आज इमाम हुसैन की मजलूमियत ने आस्था और धर्म के तमाम बंधनों को तोड़ करके हर इंसान के दिल में स्थान बना लिया है। हुसैन जंग नहीं चाहते थे। मौलाना ने जब इमाम हुसैन और जनाबे फातमा का मसायब पेश किया तो सभी लोग रो पड़े। मजलिस से पूर्व अजादार हुसैन और उनके सहयोगी ने शोजख्वानी की। शायर हारून, नवाब आलम, शारिब आदि ने पेशख्वानी की। अंत मे सैयद अबुल हसन ने सभी का आभार प्रकट किया।