आजमगढ़। फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए छठे दिन ब्लाक अतरौलिया, मार्टिनगंज, मिर्जापुर और तरवां में कार्यशाला का आयोजन कृषि विभाग की ओर से किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि नव विकसित कृषि यंत्रों के माध्यम से फसलों के अवशेष मिट्टी में मिलाए जा सकते हैं। इससे मिट्टी में कार्बनिक जीवांश की मात्रा में वृद्धि होगी।
मार्टिनगंज में मुख्य अतिथि प्रमुख ठा. मनोज सिंह ने कहा कि धान के अवशेष जलाए जाने ने जहां पर्यावरण प्रदूषण फैल रहा है, वहीं, मिट्टी में लाभदायक जीवांश तथा केंचुए की संख्या में कमी हो रही है। भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रसाद सिंह ने कहा कि इन कृषि यंत्रों पर किसानों को 40 से 50 फीसदी तक अनुदान विभाग दे रहा है। भूमि संरक्षण अधिकारी संगम सिंह मौर्य ने बताया कि खेत में फसल जलाने पर अर्थदंड का प्रावधान है। जिन किसानों ने सोलर पंप के लिए बैंक ड्राफ्ट समय से जमा नहीं किया है उन्हें अक्टूबर माह में अनुदानित दर पर सोलर पंप प्राप्त करने का पुन: अवसर दिया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरके सिंह ने धान, तिल तथा अरहर की फसलों में लगने वाले कीट एवं बीमारियों के बचाव की जानकारी दी। प्रभारी बीडीओ प्रमोद कुमार सिंह, विनीत जायसवाल, सुशील कुमार सिंह, ज्योति प्रसाद सिंह थे। अतरौलिया में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीसीबी के अध्यक्ष जयप्रकाश पांडेय आह्वान किया कि कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर किसान विविधीकरण अपनाएं। कृषि विशेषज्ञ लाल बहादुर सिंह जानकारी दी। रामकेवल यादव, डॉ. रसूल मोहम्मद, थे। मिर्जापुर में जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश कुमार गुप्त और डॉ. आरपी सिंह ने प्रशिक्षित किया। तरवां में डॉ. आरके आनंद और डॉ. हरिनाथ यादव ने जानकारी दी। ब्लाक मुख्यालय पर कार्यशाला के साथ-साथ कृषि, पशुपालन, उद्यान और निजी क्षेत्रों के कंपनियों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई थी। 200 से अधिक किसानों ने प्रतिभाग कर विभाग की योजनाओं का लाभ लिया।