आजमगढ़। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी सरकारी अस्पतालों के चिकित्सा प्रभारियों को सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। जिस पर मंडलीय अस्पताल के एसआईसी ने भी अस्पताल पर तैनात डॉक्टरों को पत्र लिख कर फरमान जारी कर दिया है। मंडलीय अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. श्री कृष्ण गोपाल सिंह ने बताया कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसमें कहा गया है कि अस्पताल के ओपीडी के लिए निर्धारित समय सीमा सुबह 8 से दिन के दो बजे के बीच कोई भी सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेगा। इस दौरान यदि सरकारी अस्पताल पर तैनात कोई भी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंडलीय अस्पताल पर तैनात सभी डॉक्टरों को पत्र जारी कर इस बाबत जानकारी दे दी गई है। नियमत: तो सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस करने से पूरी तरह से रोक है। सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस न करें इसके लिए सरकार इन्हें वेतन भत्ते के अलावा नॉन प्रैक्टिस अलाउंस भी देती है। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के फरमान के बाद एसआईसी द्वारा जारी किए गए पत्र को देख कर तो यही प्रतीत होता हे कि अब सरकारी डॉक्टरों को नॉन प्रैक्टिस अलाउंस लेते हुए ओपीडी की टाइम के बाद प्राइवेट प्रैक्टिस की खुली छूट मिल गई है। इस बाबत पूछे जाने पर एसआईसी ने कहा कि फिलहाल जो निर्देश हुआ है, उसके अनुपालन का प्रयास शुरू किया गया है। सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए सरकार जैसे कदम उठाएगी, उसका पूरी तरह से अनुपालन किया जाएगा।