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स्वच्छ भारत मिशन में पिछड़े, फिर भी खर्च नहीं कर पाए करोड़ों

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स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में जनपद में शौचालय निर्माण व ओडीएफ की स्थिति को लेकर सूबे में सबसे निचले जिलों में शामिल है। दूसरी तरफ इस योजना में साल भर पहले आए पांच करोड़ रुपये का कोई इस्तेमाल ही नहीं हुआ। अब मामला डीएम के पास पहुंचने पर विभाग की ओर से धनराशि खर्च करने की तैयारी हो रही है।
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केंद्र में वर्ष 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद स्वच्छ भारत मिशन योजना शुरू हुुई थी। योजना मेें बेस लाइन सर्वे में चयनित परिवारों के शौचालय बनवाना और गांवों को खुले में शौचमुक्त कराना है। सरकार ने इसके लिए दो अक्तूबर तक समय सीमा रखी है। इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता से वर्ष 2017 की शुरुआत तक योजना के तहत जनपद में कार्य शून्य के बराबर हुआ। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कड़ाई की गई तो कुछ प्रगति हुई। इसके बाद भी जनपद का स्थान सूबे में अभी भी सबसे निचले जिलों में शामिल है। इस संबंध में जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग की उदासीनता शामिल है। योजना के प्रचार-प्रसार, जिसके तहत खुले में शौच से होने वाले नुकसान और शौचालय निर्माण से होने वाले फायदे को बताने के लिए आईईसी (इंर्फामेशन, एजुकेशन और कम्युनिकेशन) के तहत आए लगभग पांच करोड़ रुपये जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग में पड़े रहे। इन पैसों से नुक्कड़ नाटक, होर्डिंग्स, बैनर, पंफलेट, एलईडी वाहन आदि से योजना का प्रचार-प्रसार किया जाना था। राशि विभाग के पास पड़ी रही, लेकिन किसी ने इसे खर्च करने के जरूरत ही नहीं समझी। खराब स्थिति को लेकर एक डीपीआरओ के निलंबित होने और आगे बड़े अधिकारियों की भी गर्दन फंसने की आशंका बलवती होने पर इसकी सुधि ली गई। 000000
शुरू हुई टेंडर की प्रक्रिया
आजमगढ़। इतने समय से योजना के प्रसार-प्रचार का आया धन डंप होने के मामले का पता चलने पर जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने डीपीआरओ को कड़ी फटकार लगाई है। इसके बाद विभाग की ओर से धनराशि को खर्च करने की कवायद शुरू की गई है। विभाग की ओर से प्रचार-प्रसार के लिए 100 होर्डिंग्स लगाने, बैनर, पोस्टर, पंफलेट, वाल राइटिंग, नुक्कड़ नाटक, लोकगीत आदि के प्रस्ताव को जिला स्वच्छता समिति से पास कराया गया है। टेंडर आदि भी कराया जा रहा है।
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छोटे टेंडरों पर उठ रहे सवाल
आजमगढ़। डीएम की फटकार के बाद विभाग की ओर से टेंडर तो कराया जा रहे हैं। लेकिन इन पर कई संस्थाओं ने अंगुली उठानी शुरू कर गदी है। उनका कहना है कि विभाग छोटे-छोटे टेंडर करा के धनराशि में हेर-फेर करने में तुला है। संस्थाओं का कहना है कि टेंडर आदि के बारे में पर्याप्त माध्यमों से जानकारी भी नहीं दी जा रही है। इनका आरोप है कि विभाग के पास लगभग नौ करोड़ रुपये हैं, लेकिन विभाग सही जानकारी नहीं दे रहा है। वहीं विभाग ने इन आरोपों से इंकार किया है।
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अभी बनने हैं तीन लाख शौचालय
आजमगढ़। शौचालय के लिए विभाग की ओर से 6.38 लाख लोगों का सर्वे कराया गया था। इसमें 1.29 लाख लोगों के पास शौचालय थे। अभी भी तीन लाख से ज्यादा लोगों के शौचालय बनवाने हैं। 3928 राजस्व ग्रामों में अभी 533 तो ही ओडीएफ कराया जा सका है।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत राज्य और केंद्र सरकार से प्राप्त होमने वाली धनराशि का कुछ प्रतिशत आईईसी के तहत प्रचार-प्रसार के लिए भी आती है। विभाग के पास इस मद में चार-पांच करोड़ रुपये मौजूद हैं। इसे खर्च नहीं किया जा सका था। अब जिला स्वच्छता समिति की मुहर लग गई है। टेंडर कराए जा रहे हैं।
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आनंद प्रकाश, डीपीआरओ
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