आजमगढ़। जिलाधिकारी के प्रयास और अमर उजाला की मुहिम से शुरू हुआ तमसा सफाई का महाभियान अपने अंतिम पड़ाव पर है। गुरुवार को जहां पूरा जनपद योगा करने में मशगूूल था वहीं सफाई कर्मी और तमसा प्रेमी नदी की सफाई में जुटे हुए थे। नगरपालिका की जेसीबी भी भोला घाट पर घाटों तक जमा मिट्टी को हटाने और नदी के अवरूद्घ रास्ते को खोलने में जुटी हुई थी। गुरुवार को जहां पूरा जनपद योगमय हुआ था वहीं तमसा सफाई का कारवां भी भोला घाट से आगे बढ़ा। हालांकि कुछ सामाजिक संगठन योग दिवस में भाग लेने के कारण इसमें शामिल नहीं हो सके। लेकिन सफाई कर्मियों और जागो युवा संस्थान के साथ कुछ तमसा प्रेमियों ने तमसा सफाई के इस अभियान को रूकने नहीं दिया। योग दिवस में भाग लेने के बाद एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह भी पहुंच गए। एडीएम प्रशासन के पहुंचते ही लोगों का उत्साह बढ़ गया और भोला घाट से शुरू हुआ तमसा सफाई का कारवां गौरीशंकर घाट पहुंच गया। इस दौरान हथिया पुल के नीचे और भोला घाट की सीढ़ीयों के नीचे काफी मात्रा में मिट्टी जमा होने के कारण नदी ने अपनी धारा को बदल दिया था। जिसे देखते हुए नगर पालिका की तीन जेसीबी को मिट्टी हटाने के लिए और नदी के अवरूद्घ हुए रास्ते को खोलने के लिए लगाया गया था। जैसे ही हथिया पुल के नीचे से नदी के अवरुद्घ रास्ते को खोला गया नदी की धारा तेज हो गई। गुरुवार को सफाई अभियान में इफ्तेखार अहमद, एजाज अहमद, केके सिंह, इसरार अहमद, संजय श्रीवास्तव, जागो युवा संस्थान के विनीत सिंह रीशू, आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति के संयोजक एसके सत्येन आदि उपस्थित थे।
सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने भी लिया भाग
आजमगढ। उप्र पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्रांति सिंह के नेतृत्व में गुरूवार को भोला घाट और गौरी शंकर घाट की सफाई की गई। इस दौरान उनके साथ भारी संख्या में सफाईकर्मी मौजूद रहे। प्रदेश अध्यक्ष क्रांति सिंह ने कहा कि जल के बिना जीवन संभव नहीं है। अपनी संस्कृति व नदियां को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है। जिलाध्यक्ष बसंत कुमार बौद्ध और जिला मंत्री ओंकार नाथ ने अपने साथियों के साथ संकल्प लिया कि तमसा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए जनपद के सभी ग्रामीण सफाई कर्मचारी पूरी तरह तैयार हैं। जिलाधिकारी और डीपीआरओ की अनूठी पहल का परिणाम है कि तमसा अविरल हो रही है। उन्होंने इस मुहिम में सभी से जुडने की अपील की। तमसा की सफाई में ओंकार नाथ, महेंद्र प्रताप, कृष्णानंद राय, जिलाजीत राय, समरजीत राम, सुरेश गौतम, अंशदीप, परमिंदर लाल, टीपू, लल्लन, हरेंद्र यादव, त्रिवेणी, ओमप्रकाश यादव आदि शामिल थे।