जब इन दर्ज संपत्तियों की जांच की गई तो जांच कमेटी ने शिया वक्फ बोर्ड की 90 और सुन्नी वक्फ बोर्ड की 738 संपत्तियों को खारिज कर दिया। इसमें संशोधन करके फिर से दाखिल करने के लिए 30 जून तक का समय दिया लेकिन इन संपत्तियाें का कोई संशोधित ब्योरा दर्ज नहीं किया गया।
केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 लागू करने के बाद सभी वक्फ संपत्तियों का उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया था। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद वक्फ ट्रिब्यूनल को समय बढ़ाने का अधिकार मिला।
उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अवधि 30 जून तक संशोधन का समय दिया था। समय सीमा बीतने के बाद सिर्फ 144 संपत्तियों के ब्योरे में संशोधन किया गया। 828 संपत्तियां रिजेक्टेड की श्रेणी में ही रह गईं।
अब इन संपत्तियों का क्या होगा इस बारे में विभागीय अधिकारियों को भी कोई जानकारी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि हमें संपत्तियों को अपलोड कराने और उनकी जांच का जिम्मा मिला था। जिसे हमने पूरा कर दिया।
अब रिजेक्टेड संपत्तियों का क्या होगा। इसके बारे में वह कुछ नहीं बता सकते।