आजमगढ़। जहानांगज के पुनर्जी स्थित भावानंद संस्कृत महाविद्यालय में सिर्फ बीएसए के अनुमोदन के आधार पर फर्जी तरीके से तीन सहायक अध्यापकों की नियुक्ति करने और उन्हें वर्ष 2016 से वेतन जारी करने के मामले में तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों प्रशासन का फंदा कसने लगा है। उप शिक्षा निदेशक संस्कृत की ओर से शासन के निर्देश पर तत्कालीन डीआईओएस चंद्रजीत यादव, वित्त एवं लेखाधिकारी और दोषी कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब लेने तथा सभी का उत्तदायित्व निर्धारत करते करते हुए डीआईओएस से एक सप्ताह में आख्या तलब की गई है। शासन के निर्देश से विभाग में हड़कंप मचा है।
जनपद में संचालित संस्कृत महाविद्यालयों में अध्यापकों को माध्यमिक शिक्षा विभाग के माध्यम से वेतन जारी किया जाता है। जिले में संपूर्णानंद संस्कृत महाविद्यालय से संबद्ध लगभग 30 विद्यालय संचालित है। इसमें जहानागंज के पुनर्जी स्थित भावानंद संस्कृत महाविद्यालय की ओर से वर्ष 1997 में प्राथमिक सेक्शन चलाने के लिए बीएसए से मान्यता ले ली गई। वर्ष 2016 में माध्यमिक शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से प्राथमिक सेक्शन के अध्यापकों का भी वेतन शुरू कर दिया गया। जबकि प्राथमिक सेक्शन के अध्यापकों को वेतन जारी करने के लिए शासन से कोई ग्रांट माध्यमिक शिक्षा विभाग को जारी नहीं की जाती है। डीआईओएस डॉ. वीके शर्मा ने गत वर्ष नवंबर माह में मामला पकड़ में आने पर तीन अध्यापकों को वेतन पर रोक लगा दी थी। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। शासन की ओ्र से भी भावानंद संस्कृत महाविद्यालय के प्राथमिक सेक्शन में तैनात तीनों अध्यपकों की नियुक्ति को विधि सम्मत नहीं माना। इसके साथ ही शिक्षा निरदेशक संस्कृत अनुभाग के कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया। इस पर उप शिक्षा निदेशक संस्कृत प्रमोद कुमार ने जेडी आजमगढ़ में निर्देशित किया है। तीन शिक्षकों के अनियमित भुगतान के लिए तत्कालीन डीआईओएस को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा है। साथ ही ये पूछने के लिए कहा है कि किन परिस्थितियों में ये भुगतान किया गया है। इसके लिए कौन कौन से अ धिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार है उनका उत्तरदायित्व निर्धारित कर एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।
जद में आएंगे कई अधिकारी और कर्मचारी
आजमगढ़। शासन के निर्देश के बाद तत्कालीन डीआईओएस, पटल सहायक, लेखाधिकारी और पटल सहायक कार्रवाई की जद में आएंगे। इसमें एक अधिकारी और कर्मचारी पहले से ही अन्य नियुक्ति को लेकर जांच के घेरे में हैं। अब इनके ऊपर फिर कर्रावाई का खतरा मंडराने लगा है।
फर्जी प्रकरण में शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। इसमें शासन के निर्देश पर उपनिदेशक संस्कृत ने जेडी को जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। अब उन्हीं के स्तर से कार्रवाई होनी है।
डॉ. वीके शर्मा, डीआईओएस