आजमगढ़। रिहायशी क्षेत्र में ज्वलनशील पदार्थो के गोदाम बनाने पर प्रतिबंध है। इसके बाद भी इस रिहायशी क्षेत्र में बने गोदाम पर न तो प्रशासनिक अमला न ही पास में मौजूद फॉयर स्टवशन की ही नजर गई। जबकि अगलगी की बड़ी घटना के बाद प्रशासन आबादी के बीच ज्वलनशील पदार्थो का गोदाम न होने की चेतावनी देता रहता है, फिर भी जो घटना होती है वह आबादी के बीच ही होती है। पॉलिथीन, थर्माकोल भी अत्यंत ज्वलनशील पेट्रोलियम पदार्थो की श्रेणी में आते है। इनका गोदाम रिहायशी क्षेत्र में नहीं हो सकता है। अलगली की कोई बड़ी घटना के बाद प्रशासनिक अमला आबादी के बीच गोदाम न बनाने का फरमान भी जारी करता है, लेकिन कभी इसकी चेकिंग प्रशासन द्वारा नहीं की जाती है, जिसका परिणाम है कि मानक के विपरीत रिहायशी क्षेत्रों व मकानों में लोग गोदाम बना लेते है। ब्रह्मस्थान स्थित मनीष बरनवाल के लिए मकान में पॉलिथीन व थर्माकोल से बने समानों का गोदाम है। इससे चंद कदम की दूरी पर ही फॉयर स्टेशन भी मौजूद है। हर दूसरे-तीसरे दिन बीच सड़क पर दस टायरा ट्रक खड़ी कर माल उतार कर गोदाम में रखा जाता था लेकिन फॉयर स्टेशन के जिम्मेदारों ने कभी यह पता करने का प्रयास नहीं कयिा कि आबादी के बीच आखिर ट्रक लदा माल रखा कहा जा रहा है। वहीं ऐसा ही कुछ हाल पुसिल प्रशासन का भी मौके से 300 से 350 मीटर की दूरी पर ब्रह्मस्थान चौकी है लेकिन यहां तैनात इंस्पेक्टर व पुलिस कर्मी भी इस ओर ध्यान नहीं दिए। नपा प्रशासन की बात की जाए तो इनकी बात ही कुछ निराली है जब नपा के ईओ कार्रवाई के दौरान नहीं उपस्थित हो सके तो सामान्य तौर पर वे कितने जिम्मेदार होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
घर-घर चेकिंग करने की हमारी जिम्मेदारी नहीं है। यदि कोई आवेदन अथवा शिकायत आती है तो ही हम कुछ कर सकते है। कार्यालय के पास में ही दो मकानों में गोदाम होने की बात संज्ञान में नहीं है। यदि कोई शिकायत किया होता तो हम देखते।
सत्येंद्र पांडेय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, आजमगढ़।