आजमगढ़। पुरानी जेल की जमीन को सरकार की बताते हुए जिला प्रशासन ने एक बार फिर इसके हरित पार्क के निर्माण के लिए शासन से देने की मांग की है। इससे पहले कारागार विभाग ने जमीन को अपनी बता पार्क के लिए देने से इंकार कर दिया था। विभाग का कहना था कि जमीन का उपयोग वो विभागीय कार्य के लिए करेंगे। वहीं, पार्क बनाने के लिए शासन से निर्गत हुए 59 लाख रुपये अभी भी पालिका के खाते में पड़े हुए हैं। पुरानी जेल की जमीन शहर के बीच में है। काफी समय से यहां पार्क और पार्किंग का निर्माण कराने की मांग की जा रही है। इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से काफी आंदोलन भी किया गया था। जिला प्रशासन की ओर से भी यहां पर हरित पार्क के निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। अमृत योजना के तहत शासन से इसके लिए एक करोड़ से ज्यादा की धनराशि भी स्वीकृत कर दी गई थी। इसमें 59 लाख रुपये पालिका के खाते में बभेज भी दिए गए थे, जो वैसे ही पड़े हैं। कारगार विभाग की ओर से ये कहते हुए जमीन देने से इंकार कर दिया गया था कि इसका उपयोग विभागीय कार्यों के लिए किया जाएगा। इससे पार्क निर्माण की योजना ठप पड़ गई थी। अब जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने पार्क को फिर से बनवाने की सुधि ली है। इसके लिए उन्होंने प्रमुख सचिव कारागार प्रशासन को पत्र भेजा है। इसमें कहा है कि राजस्व अभिलेख में सदर तहसील के तीन गाटों आराजी संख्या 755 रकबा 3.630 हेक्टेयर, 756 रकबा .162 हेक्टेयर और 157 रकबा 1.269 हेक्टेयर का कुल क्षेत्रफल 5.061 हेक्टेयर जमीन आबादी, सड़क, रेलवे, मकानात, जेलखाना मालिकान सरकार बहादुर केशरे हिंद के नाम दर्ज है। दो वर्ष पहले ही मंडल कारागार के लिए और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के निवास के लिए आवास का निर्माण इटौरा में कराया जा चुका है। जेल शिफ्ट भी हो चुकी है। पुरानी की जेल की जमीन पूर्ण रूप से खाली है। शहर में पार्क की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी होती है। कई बार इसकी मांग हो चुकी है। उन्होंने शासन से पार्क बनाने के लिए जमीन खाली कराने की मांग की है।
जनहित में पार्क, खंडहर बना असमाजिक तत्वों का अड्डा
आजमगढ़। सरकार बहादुर केशरे हिंद के नाम दर्ज जमीन पर अब जेलखाना नहीं है। पुरानी जेल का भवन खंडहर हो चुका है। यहां कि खिड़कियां और दरवाजे जैसी सरकारी संपत्ति पर चोर हाथ साफ कर रहे हैं। खंडहर असमाजिक तत्वों का अड्डा बना रहता है। ये जमीन शहर कोतवाली, विकास भवन, एसपी कार्यालय, डीएम कार्यालय और आफीसर्स कालोनी के बीच में है। नागरिक सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए यहां पार्क बनान जनहित में है।
पुरानी जेल की जमीन सरकार बहादुर केशरे हिंद के नाम दर्जहै। जेल यहा से शिफ्ट हो चुकी है। अब यहां कोई जेलखाना नहीं है। सरकार की इस जमीन को जनहित पार्क बनाने के लिए आवंटित करने की मांग प्रमुख सचिव से की गई है।
शिवाकांत द्विवेदी, जिलाधिकारी