आजमगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 जुलाई की जनसभा को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी परिषदीय विद्यालयों को तो बंद कराया ही लगे हाथ अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए इंटर कालेजों को भी बंद करने का आदेश जारी कर दिया। जैसे ही यह आदेश निर्गत हुआ इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि आखिर कोई अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर कोई आदेश कैसे जारी कर सकता है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय को लीक से हटकर कार्य करने की आदत हो गई है। एक तो उन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जनपद के सारे परिषदीय विद्यालयों में 14 जुलाई को विशेष अवकाश घोषित कर दिया। दूसरे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए इंटर कालेजों को भी बंद रखने का फरमान जारी कर दिया। जब यह आदेश जारी हुआ तो यह लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। मीडिया कर्मियों ने जब इसके बारे छानबीन शुरू की तो पता चला कि बीएसए द्वारा जिन विद्यालयों के प्रबंधकों की मर्जी से विद्यालय को बंद करने का फरमान जारी करने का हवाला दिया गया था। उन्हीं कालेजों के कुछ प्रबंधकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम तो विद्यालय को बंद नहीं करना चाहते थे। लेकिन विद्यालय चलाना है तो उनकी बात माननी ही होगी। इन प्रबंधकों की बात से यह बात स्पष्ट हो गई कि उन्होंने अपनी मर्जी से नहीं बल्कि प्रशासन के भय से 14 जुलाई को विद्यालयों को बंद किया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पर लोगों का कहना है कि वह भाजपा के एजेंट की तरह कार्य कर रहे हैं। भीड़ को जुटाने के लिए उनके द्वारा यह विशेष छुट्टी घोषित की गई है।
मुझे इस बात की जानकारी नहीं है क्या बीएसए साहब की ओर से कोई आदेश जारी किया गया है। वैसे वह भी अधिकारी हैं चाहें तो इंटर कालेजों को भी बंद करने का आदेश जारी कर सकते हैं।
डा. वीके शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक।
कुछ प्रबंधकों ने मेरे पास एक पैड पर हस्ताक्षर कर दिया था कि वह लोग इस दिन विद्यालय को बंद रखने की इजाजत चाहते थे। ताकि वह और छात्र प्रधानमंत्री का संबोधन सुन सकें लेकिन अगर इस पर एतराज है तो मैं छ़ुट्टी को निरस्त कर दूंगा। इंटर कालेजों की बंदी का आदेश डीआईओएस साहब की सहमति से जारी किया गया।
देवेंद्र कुमार पांडेय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
जो न्यूज प्रकाशित हुई है वह पूरी तरह से गलत है। कोई भी विद्यालय बंद नहीं है। इसमें परेशान होने की जरूरत नहीं है।
शिवाकांत द्विवेदी, जिलाधिकारी।