आजमगढ़। पूर्वांचल मुक्ति मोर्चा की बैठक बुधवार को रोडवेज स्थित संगठन कार्यालय पर हुई। जिसमें रोडवेज कर्मचारियों की मनबढ़ई पर आक्रोश जताया गया। इसके साथ ही सड़क पर रोडवेज बसों का ठहराव हटाये जाने की मांग को लेकर 24 मार्च को धरना-प्रदर्शन का निर्णय लिया गया।
मोर्चा के जिलाध्यक्ष सौरभ यादव ने कहा कि रोडवेज प्रशासन एक तो सड़क पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है तो वहीं उसके कर्मचारी मनबढ़ई पर उतारू है। आये दिन रोडवेज के मनबढ़ कर्मचारी किस न किसी से विवाद करते रहते है। इतना ही नहीं सड़क पर अवैध रुप से बेतरतीब बसों के खड़े होने से आम जनता को आवागमन में परेशानी भी उठानी पड़ती है। इतना ही नहीं प्रेशर हार्न के चलते क्षेत्र के लोगो की रात की नींद भी गायब हो चुकी है। यदि कोई इसका विरोध करता है तो मनबढ़ कर्मचारी उस पर टूट पड़ते है। ऐसी ही कुछ स्थित कुछ दिनों पूर्व उत्पन्न हुई तो मनबढ़ कर्मचारियों ने सामाजिक कार्यकर्ता के भाई को जहां पीट दिया तो वहीं मुकदमा भी पंजीकृत कराया। पुलिस प्रशासन ने भी कर्मचारियों के दबाव में आकर सामाजिक कार्यकर्ता और उनके परिजनों पर कार्रवाई कर दी। लाखों की लागत से रोडवेज परिसर बन कर तैयार है बसो को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह है, फिर भी बसों को सड़कों पर खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रोडवेज प्रशासन को 23 तक व्यवस्था में सुधार का अल्टीमेटम दे दिया गया है। इसके बाद 24 को संगठन रोडवेज तिराहे पर ही धरना-प्रदर्शन की शुरूआत कर देगा। उन्होंने कहा कि यदि रोडवेज प्रशासन बसों का रोडवेज परिसर में इंट्री नरौली पुल से घुमा कर बवाली मोड़ हाते हुए करा दे और निकासी गिरजाघर तिराहे की तरफ से कराये तो सारी समस्या का तत्काल समाधान हो जाए। बैठक में अमित राज, बजरंगी सिंह, पीयूष यादव, मो. कैफी, राजीव उपाध्याय, मनीष यादव, रोहन सागर, मुनमुन, राजेश यादव समेत काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सामाजिक संगठनों ने भी डीएम को भेजा पत्रक
आजमगढ़। जिले के सामाजिक संगठनों ने भी बुधवार को जिलाधिकारी को पत्रक भेज कर रोडवेज की व्यवस्था में सुधार की मांग की। इसके साथ ही संगठन के लोगों ने सामाजिक कार्यकर्ता और उसके भाईयों पर दर्ज मुकदमा वापस लिये जाने की भी मांग उठाई। पूर्वांचल विकास आंदोलन के प्रवीण सिंह ने कहा कि रोडवेज प्रशासन की शह पर ही उसके कर्मचारी मनबढ़ हो गए है। वर्तमान में स्थिति यह है कि रोडवेज प्रशासन का अपने कर्मचारियों पर ही कोई दबाव नहीं रह गया है। पुलिस प्रशासन ने भी एकतरफा कार्रवाई की और सामाजिक कार्यकर्ता और उनके परिजनों का ही उत्पीडन किया। उन्होंने कहा कि रोडवेज कर्मचारियों ने घटना के दिन चार घंटे तक सड़क को जाम कर रखा था, इसके बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं सामाजिक कार्यकर्ता पक्ष की तरफ से दी गई तहरीर मुकदमा भी दर्ज नहीं किया। उन्होंने बताया कि सभी सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए पत्रक के माध्यम से डीएम से मिलने का समय मांगा है।