आजमगढ़। चंद्रग्रहण के कारण बुधवार की सुबह आठ बजे के करीब मंगला आरती के बाद मंदिरों के पट बंद हो गए। ग्रहण का समय शाम 5.35 बजे से 8.42 तक होने के कारण किसी भी घर में भोजन नहीं बना। लोग टकटकी लगाए चंद्रग्रहण को देखने के लिए मैदानों और छतों पर उमड़े रहे। लेकिन कोहरे के कारण शाम साढे़ सात बजे तक चांद नहीं दिखा। करीब आठ बजे साल के पहले चंद्रग्रहण का लोगों ने नजारा देखा।
चंद्रग्रहण से नौ घंटा पूर्व ही सूतक लग जाता है। जिसके कारण सुबह आठ बजते-बजते मंगला आरती के बाद जनपद के सभी प्रसिद्घ मंदिरों भवरनाथ, दक्षिणमुखी देवी, बड़ा गणेश मंदिर आदि के कपाट बंद कर दिए गए। कई जगहों पर लोगों ने भजन कीर्तन किया। शाम के 5.35 बजते ही सभी की निगाहें आसमान पर जा टिकी। रात आठ बजे के करीब चांद के दर्शन हुए। चंद्रग्रहण को देखने के लिए लोग घर की छतों पर और मैदानों पर जमे हुए थे। इस दौरान सड़कों पर भी आवाजाही काफी कम हो गई थी। बहुत से लोग चंद्रग्रहण के दौरान घरों से बाहर निकलना भी गवारा नहीं समझे।चंद्रग्रहण के दौरान किसी भी घर में चूल्हे नहीं जले। चंद्रग्रहण की समाप्ति के बाद महिलाओं ने नहा-धोकर भोजन तैयार किया। इसके बाद सभी एक साथ बैठकर भोजन किया। हालांकि लोगों ने इस दौरान कार्य तो किया लेकिन खाने पीने से परहेज किया।
अभिषेक ने बताया कि चंद्रग्रहण देखने के लिए वह काफी उत्सुक थे। चंद्रग्रहण लगने के समय से पूर्व ही वह छत पर चढ़ गए लेकिन चांद के दर्शन के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। इस क्षण को हमने अपने मोबाइल में भी कैद किया है।
राशिद आलम और विशाल ने कहा कि पहली बार चंद्र ग्रहण देखने का सौभाग्य मिल रहा था। इसलिए उत्तेजना में काफी पहले से ही मैदान में मोबाइल लेकर पहुंच गए। काफी देर बाद रात लगभग आठ बजे चांद के दर्शन हुए।
रामवृक्ष ने कहा कि चंद्रग्रहण तो कई बार देखा है। लेकिन इस बार के चंद्रग्रहण को बहुत खास बताया जा रहा था। इसलिए इसे देखने की चाह थी इसलिए छत पर पहुंच गया और ऐसा लगा जैसे चंद्र को राहु अपने मुख में ले रहा हो।
इंदल सोनकर ने कहा कि चंद्रग्रहण के कारण आज हमारे घर में अब तक खाना नहीं बना है। घर के सभी सदस्य छत पर जमे हुए थे। चांद के दिखने के बाद सभी लोग खुशी से उछल गए। हम लोगों ने चंद्रमा के साथ मोबाइल से सेल्फी भी खींची।