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धान और गेहूं की तरह हो साड़ियों की खरीद तो बने बात

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अमिलो। रेशमी नगरी मुबारकपुर के बुनकर बनारसी साड़ी कारोबार में आ रही परेशानियों से उबरने की फिराक में जुटे हैं ताकि मुबारकपुर की पुरानी शोहरत को दोबारा हासिल कर सकें। इसके लिए उन्हें बजट में सरकार से कई उम्मीदें हैं। कुछ लोग कच्चे माल पर लगे जीएसटी में छूट की आस लगा रहे हैं तो कई सरकार द्वारा दी जाने वाली छूट के खत्म होने की आशंका में सहमे हुए हैं।
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एक समय था मुबारकपुर का रेशम उद्योग देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी अलग पहचान रखता था। लेकिन एक दंगे ने मुबारकपुर के कारोबार की सारी रौनक ही छीन ली। इस पेशे से जुड़े लोग इस कारोबार को दोबारा नई ऊंचाई पर देखना चाहते हैं लेकिन वह अपने इस मकसद में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। बुनकर के कच्चे माल पर पहले जीएसटी नहीं लगता था लेकिन सरकार ने इस पर जीएसटी लगाकर बुनकरों की कमर और तोड़ दी है। नए बजट में उन्हें जीएसटी से राहत मिलने की संभावना है। बुनकरों को सरकार के द्वारा अनेक योजनाओं के माध्यम से छूट दी जाती है। कइयों को इस छूट के समाप्त होने का अंदेशा सता रहा है।
मुबारकपुर निवासी मुख्तार अहमद जे ने कहा कि सरकार एक एक करके कल्याणकारी योजनाओं का बन्द करती जा रही है और जो योजनाएं सरकार आम आदमी के लिए लागू की थी उसको भी अमलीजामा नहीं पहनाया गया। किसान और बुनकर एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ऐसे में किसानों की तर्ज पर बुनकरों के लिए विशेष छूट की व्यवस्था हो ताकि साड़ी उत्पादन में बुनकरों का लाभ हो सके।
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बुनकर गुफरान अहमद ने कहा कि बुनकरों को यह आशा है कि फ्लैट रेट पर दी जाने वाली बिजली पावरलूम की तर्ज पर घरेलू बिजली का बिल भी कम से कम दर पर बुनकरों के लिए आगामी बजट में निर्धारित किया जाए तो बुनकरों का भला होगा। यह भी आशा है कि बुनकरों को जीएसटी से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाए क्योंकि बुनकर जीएसटी की मार से कराह रहा है।
बुनकर अजीज अहमद अंसारी ने कहा कि सरकार बुनकरों के लिए काफी योजनाएं चलाई लेकिन उसका सीधा लाभ बुनकरों को नहीं मिल सका। इसलिए बजट में बुनकरों को लाभांवित करने के लिए जीएसटी से छूट दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी की वजह से काफी कारखानें बंद हो गए हैं। पूर्व में मुबारकपुर की गलियां हथकरघा की खटर पटर से काफी गुलजार हुआ करती थीं जो धीरे धीरे कम होती जा रही हैं।
बुनकर जफर अहमद अंसारी का कहना है कि सरकार अपने बजट में बुनकर समाजवादी पेंशन योजना को पुन: लागू करने के साथ साथ बुनकरों द्वारा तैयार रेशमी साड़ी खरीद करने का प्राविधान करे। जिस प्रकार से किसानों के गेहूं और धान आदि की खरीद सरकारी दर से किसानों से लेती है। उसी तरह से बुनकरों का तैयार माल भी सरकार उचित दर से खरीदे।
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