आजमगढ़। पिछले दो दिनों से जनपद में बढ़ी गलन ने सभी को ठिठुरने को विवश कर दिया है। बुधवार को कोहरे ने जनपद को अपने आगोश में ले लिया जिसके कारण गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे ठिठुरते हुए विद्यालय जाते दिखे। डीएम के आदेश पर नगर निकायों में मंगलवार की शाम से नगर के ज्यादातर जगहों पर अलाव जलने लगे हैं।
पहाड़ों पर हुई बर्फबारी का असर अब जनपद में देखने को मिल रहा है। बुधवार को जनपद घने कोहरे के आगोश में रहा। घने कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम रही, जिसके कारण गाड़ियों की तेज रफ्तार पर ब्रेक लग गया। सड़कों पर फर्राटा भरने वाले वाहन लाइट जलाकर रेंगते हुए नजर आए। शहर में तो कम लेकिन ग्रामीण इलाकों में घने कोहरे के कारण वाहनों का चलना काफी मुश्किल रहा। सूर्य निकलतेे ही लोग कुर्सी आदि लेकर धूप में बैठे नजर आए। दिन के समय गलन से राहत मिली लेकिन शाम ढ़लते ही गलन फिर बढ़ गई। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को हुई। बच्चे ठिठुरते हुए विद्यालय जाने को मजबूर हैं। जिसे देखते हुए अब विद्यालयों के समय में परिवर्तन करने की मांग भी उठने लगी है। नगर पालिका और नगर पंचायतों में जिलाधिकारी के निर्देश पर जगह-जगह अलाव जलाया जा चुका है। हालांकि बुधवार को भी गरीबों के लिए बनाए गए रैन बसेरे में कोई व्यवस्था नहीं की गई। रैन बसेरे के दरवाजे में ताला बंद था लेकिन नीचे का दरवाजा खुला हुआ था। लेकिन कोई भी कर्मचारी वहां पर मौजूद नहीं था।
अलाव जलाकर फोटो भेजने के निर्देश
बढ़ी गलन को देखते हुए जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने सभी नगर निकायों को अपने-अपने क्षेत्र में अलाव जलाकर उसकी फोटो भेजने का निर्देश दिया गया। जिसके क्रम में मंगलवार की शाम को जनपद की दोनों नगरपालिकाओं और 11 नगर पंचायतों में अलाव जलने लगे। मंगलवार रात को ही नगरपालिका आजमगढ़ की नगर पालिकाध्यक्ष शीला श्रीवास्तव ने रेलवे स्टेशन सहित अन्य जगहों पर अलाव की व्यवस्था का जायजा लिया। जिले में ठंड से बचाव के लिए किए जा रहे उपायों की निगरानी जिलाधिकारी स्वयं कर रहे हैं।
ठंड के कारण बढ़ी मरीजों की तादाद
आजमगढ़। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. जीएल केसरवानी ने बताया कि ठंड शुरू होने के कारण सर्दी, खांसी, बुखार और सांस के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। विगत तीन दिनों से ठंड से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। लगभग 135 मरीज प्रतिदिन इन बीमारियों से पीड़ित होकर ओपीडी में पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि ठंड के दौरान जब भी घर से निकले पूरे बदन को ढ़ंककर निकलें। कानों को टोपी या मफलर से बांध के रखे। कोहरे में सबसे ज्यादा परेशानी सांस और दमा रोगियों को होती है। इसलिए ऐसे रोगी कोहरे के दौरान घरों में ही रहे। धूप निकलने के बाद ही घरों से बाहर निकलें। कोई भी समस्या होने पर तत्काल चिकित्सक की सहायता लें।