लाख कड़ाई के बाद भी जनपद के 76 मिल अवशेष कस्टम चावल का 16.95 करोड़ बकाया जमा करने को तैयार नहीं है। विभाग की ओर से जब भी रुपये जमा करने के लिए दबाव बनाया जाता है, मिल मालिकों की ओर से मुख्यमंत्री तक सिफारिश कर मामले का दबा दिया जाता है। अब जिलाधिकारी और एडीएम वित्त एवं राजस्व ने सभी एसडीएम को राइस मिलों की कुर्की कर वसूली करने के निर्देश दिए हैं।
जनपद के 76 राइस मिल पर चालक आपूर्ति का 16.95 करोड़ बकाया हैं। वर्ष 2011-12 में 46 राइस मिलों ने धान तो लिया लेकिन 1449.25 लाख के चावल की आपूर्ति नहीं की। विभाग की ओर से दबाव बनाया तो मिलों ने 612.70 लाख रुपये जमा कर दिए गए।
इसके बाद भी 836.55 लाख रुपये 46 मिलों पर बकाया हैं। वर्ष 2012-13 में भी 30 राइस मिलों ने धान लिया लेकिन 1363.85 लाख के चावल की आपूर्ति नहीं की। विभाग के दवाब बनाने के बाद 504.95 लाख रुपये जमा किए गए।
30 मिलों पर भी 858.90 लाख रुपये बकाया है। दो वित्तीय वर्षों में कुल 76 मिलों पर अभी 1695.45 लाख रुपये बकाया हैं। धान खरीद के दौरान शासन से इन मिलों का 50 फीसदी बकाया धनराशि जमा कर चावल देने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बाद भी बकायेदार मिलरों की ओर से इसका अनुपालन नहीं किया गया। अब जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी और एडीएम वित्त एवं राजस्व बीके गुप्ता ने सभी एसडीएम को बकायेदार मिलों की कुर्की और नीलामी कर धनराशि की वसूली करने के निर्देश दिए हैं।