आजमगढ़। थोड़े से फायदे के लिए अधिकारियों को नियमों को भी ताख पर रखने से कोई गुरेज नहीं है। जनपद के एक तत्कालीन एसडीएम ने बिना शासन की अनुमति के 132 की जमीन का श्रेणी परिवर्तनकर दिया। मामले की जानकारी होने से पड़कंप की स्थिति है। फूलपुर तहसील के गोधना गांव निवासी सतीश चंद्र यादव ने डीएम एवं शासन से शिकायत की है कि तत्कालीन एसडीएम फूलपुर ने ग्रामसभा के गलत प्रस्ताव पर बिना शासन की अनुमति से गांव की भीटे और बंजर जमीन का श्रेणी परिवर्तन कर विनिमय कर दिया। ये भी आरोप लगाया है कि प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाला गांव का प्रधान भी नहीं है। जिला धिकारी ने मामले की जांच एसडीएम फूलपुर को सौंपी है।
ग्राम गोधना निवासी सतीश चंद्र यादव, हरीलाल यादव, सुनीता, संदीप आदि ने शिकायत में आरोप लगाया है कि गांव में गाटा संख्या 1328, 1329, 1333, 1334, 1330, 364 आदि 132 की बंजर, भीटा और पोखरी, भीटा, बंजर और चारागाह की जमीन हैं। उक्त जमीन का तत्कालीन एसडीएम ने अनिल कुमार सिंह ने 28 मार्च को बिना शासन की अनुमति और भूमि प्रबंध समिति के गलत प्रस्ताव पर श्रेणी परिवर्तन कर दिया। राजस्व संहिता में 132 की जमीन में स्पष्ट आदेश हैं कि शासन की बिना अनुमति के जमीन का श्रेणी परिवर्तन नहीं हो सकता है, लेकिन शासन से कोई आदेश भी नहीं लिया गया। ये भी आरोप लगाया गया कि उक्त भूमि खाली नहीं हैं। इस पर धार्मिक स्थल और विद्यालय और मकान बने हैं। इन पर कोई कार्रवाई न कर जमीन की श्रेणी बदल दी और इसे ग्राम सभी की जमीन में परिवर्तिति कर काबिज लोगों को वैध करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
ये भी आरोप लगाया गया है कि भूमि प्रबंधन समिति के प्रस्ताव पर प्रधान के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। प्रधान की मौत हो चुकी थी। जिलाधिकारी की ओर से मो. अफजर को कार्यवाहक नियुक्त किया गया था। कथित प्रधान, लेखपाल और राजस्व निरीक्षक में भारी खेल कर विनिमय आदेश फर्जी प्रस्ताव पर कर दिया। शिकायतकर्ताओं ने मामले की जांच कर संलिप्त लोगों, अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर करने और आदेश को रद करने की मांग की है। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने मामले की जांच एसडीएम फूलपुर अशोक कुमार सिंह को सौंपी है।
कार्यवाहक प्रधान ने तैयार किया प्रस्ताव
आजमगढ़। फूलपुर तहसील के गोधना गांव में प्रधान का पद खाली थी। तत्कालीन ने किसी को कार्यवाहक प्रधान की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसी कार्यवाहक प्रधान मो. अफजर की प्रस्ताव पर जमीन का श्रेणी परिवर्तन किया गया है। कार्यवाहक प्रधान भूमि प्रबंधन समिति की ओर से प्रस्ताव दे सकता है कि नहीं ये भी जांच का विषय है।
132 के अंतर्गत सार्वजनिक उपभोग की किसी भी जमीन का श्रेणी परिवर्तन बिना शासन की अनुमति के हो ही नहीं सकता है। स्वयं राजस्व परिषद भी इसे नहीं करता है। यदि ऐसा हुआ है तो गलत हुआ है। फिलहाल मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। जानकारी के बाद ही कुछ कहूंगा।
आलोक वर्मा, मुख्य राजस्व अधिकारी
गांव में फरवरी में उप चुनाव हुए हैं। इसके बाद मेरी भाभी प्रधान बनी है। इससे पहले के कार्यवाहक प्रधान की ओर से ये प्रस्ताव दिया गया था। कुछ लोग गांव के बाहर स्थिति ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा करना चाहते थे। इसी को बचाने के लिए श्रेणी परिवर्तन कर 132 की जमीन बाहर की गई है, वहीं ग्राम समाज की जमीन को अंदर किया गया है।
सोहराब, प्रधान प्रतिनिधि
जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। न्यायालय में भी इसे रीस्टोर कर लिया गया है। शासन से बिना अनुमति के 132 की जमीन का श्रेणी परिवर्तन किया गया है। इसका निरस्त होना भी तय है। आगे मामले में और क्या कार्रवाई होगी, इसका फैसला जिलाधिकारी की ओर से किया जाएगा।
अशोक कुमार, एसडीएम फूलपुर