आजमगढ़। बाइक बनाने वाली कंपनियां भले ही बाइक पर सिर्फ दो लोगों के बैठने के लिए सीट बनाती हैं। एक बाइक पर तीन लोगों को बैठना खतरे से खाली नहीं है। खासतौर से स्पीट ब्रेकर और गड्ढायुक्त सड़कों पर खतरा ज्यादा रहता है। इसके लिए बाइक बनाने वाली कंपनियां और पुलिस भी लोगों को आगाह करती हैं। बावजूद इसके लोग नियमों का परवाह किए बगैर ही क्षमता से अधिक लोगों को बैठाकर बाइक पर चलते हैं। इनमें इनके करीबी और परिवार के सदस्य भी होते हैं। कई बार हादसा भी हो चुका है। बावजूद इसके लोग नियमों के उल्लंघन से बाज नहीं आ रहे।
यातायात विभाग से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो एक अगस्त 2017 से 31 जनवरी 2018 तक छह माह की अवधि में कुल 219 दुर्घटनाओं में 143 लोगों की मौत और 147 लोग घायल हुए हैं। इन हादसों में मरने वालों में 89 युवक, 23 महिला और 31 वृद्ध और अधेड़ शामिल हैं। इनमें से 15 दुर्घटनाएं ऐसी हुई हैं जिसमें एक बाइक पर तीन लोग सवार थे। हादसे की वजह से आठ लोगों की मौत हुई है। इसमें महिला और पुरुष दोनों लोग सवार थे। हादसे का कारण तीन लोगों के बैठने की वजह से बाइक अनियंत्रित होकर पलट गई, या फिर किसी दूसरे वाहन से टकरा गई है। जिले की ज्यादातर सड़कें गड्ढा युक्त हैं। ऐसी सड़कों पर अकेले बाइक चलाना मुश्किल भरा होता है। बावजूद इसके लोग बगैर हेलमेट लगाए ही तीन-तीन लोगों को बैठाकर फर्राटा भर रहे हैं। इतना ही नहीं लोग बाइक पर जहां क्षमता से अधिक लोगों को बैठाते हैं। वहीं बीच में या पीछे बैठने वाले को बैग या अन्य कोई भारी थैला भी पकड़ा देते हैं। स्पीड ब्रेकर पर ऐसे वाहनों के उछलने से पीछे बैठने वाला यदि संभले नहीं तो कभी भी हादसा हो सकता है। सबकुछ जानने के बावजूद लोग नियमों का पालन करने में परहेज करते हैं। नियमों का पालन कराने में पुलिस और यातायात विभाग की पुलिस भी सुस्त है।