खुद को कागजातों में जिंदा दिखाने के लिए लाल बिहारी को काफी संघर्ष करना पड़ा। जिला मुख्यालय से कोर्ट तक का चक्कर लगाते-लगाते उनके चप्पल घिस गए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। संघर्ष के इस दौर में ही लाल बिहारी ने हाईकोर्ट जाकर अपने नाम के आगे ‘मृतक’ जोड़ लिया। इसके साथ ही उन्होंने मृतक संघ बनाया।
इस संघ में उन्होंने अपने जैसे पीड़ितों को भी जोड़ा। 19 वर्षों तक संघर्ष करने के बाद 30 जून 1994 में लाल बिहारी सरकारी दस्तावेजों में जीवित हुए। बिहारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिख कर यह आवेदन भी किया कि उनके जैसे और लोगों को भी न्याय मिले। हर साल की तरह वह इस साल भी अपना पुनर्जन्म दिवस मनाएंगे। लाल बिहारी मृतक पर एक हिंदी फिल्म भी बन चुकी है।