आजमगढ़। जहानागंज स्थित मवेशीखाना की भूमि को जिला पंचायत की ओर से एक व्यक्ति को आवंटित किया गया था। उक्त व्यक्ति द्वारा उसका किराया जमा नहीं किया जा रहा था। जब लगभग एक लाख के आसपास बकाया किराया पहुंच गया तो जिला पंचायत की ओर से आरसी जारी कर दी गई। आरसी जारी होने के बाद पता चला कि आवंटित भूमि उक्त व्यक्ति के नाम हो चुकी है। एक समय आवारा पशुओं को बंद करने के लिए जगह-जगह मवेशी खाना बनाए जाते थे। इन मवेशी खानों के संचालन की जिम्मेदारी जिला पंचायत की थी। समय के साथ मवेशी खाने बंद हो गए। इसके बाद लोगों ने जिला पंचायत से दुकान आदि के लिए मवेशी खाने को आवंटित करा लिया। उनके द्वारा उसका किराया भी विभाग के पास जमा किया जाता है। इसी तरह जहानागंज स्थित मवेशीखाने का आवंटन एक व्यक्ति को किया गया था। लेकिन उक्त व्यक्ति द्वारा आवंटन के बाद उसका किराया विभाग को जमा नहीं किया गया। जब बकाया किराया एक लाख रुपये से अधिक हो गया तो जिला पंचायत की ओर से आरसी जारी की गई। आरसी जारी होने के बाद उक्त व्यक्ति मंडलायुक्त के दरबार में पहुंच गया और उसने अभिलेख दिखाकर कहा कि जिस जमीन के किराए के लिए उसे आरसी जारी की गई है, वह उसके नाम है। इस पर मंडलायुक्त नेे अपर मुख्य अधिकारी ए.के सिंह को अभिलेखों के साथ बुलाया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उक्त जमीन किसकी है।