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शहरवासियों के कन्फ्यूज कर रही घंटाघर की घड़िया

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आजमगढ़। नागरिकों को सही समय बताने के उद्देश्य से घंटाघर चौराहे पर घड़िया लगाई गई हैं, लेकिन सही समय बताना तो दूर ये घड़िया ना गरिकों को कन्फ्यूज अलग से कर रही है। हर घड़ी अलग समय बताती है। दो साल पूर्व इसका निर्माण शुरू हुआ था, जो आज तक पूरा नहीं हो सका। सबकुछ जानकारी में होने के बाद भी पालिका इसका पर मौन धारण किए गए है। किसी जनपद में कुछ स्थान ऐसे होते हैं जिससे उनकी पहचान होती है। जिले के डीएम रहे सुहास एलवाई ने नगर के चौराहों के सुंदरीकरण का कार्य कराते समय सिविल लाइन चौराहे को घंटाघर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। इसके निर्माण की जिम्मेदारी नगरपालिका को सौंपी गई। घंटाघर बनाने के लिए 2016 में लगभग 10 लाख रुपये लागत निर्धारित हुई। एक ठेकेदार को इसके निर्माण की जिम्मेदारी मिली। ठेकेदार ने कार्य शुरू किया लेकिन कार्य को पूरा किए ही ठेकेदार गायब हो गया। अलबत्ता नीचे की फिनिशिंग का कार्य पूरा किए बगैर ठेकेदार ने यहां चारो दिशाओं में चार घड़ियां लगा दी। इसके बाद नगर पालिका में सत्ता परिवर्तन हो गया और ठेकेदार भी आधूरा कार्य छोड़कर फरार हो गया। आज भी घंटाघर चौराहे पर लगी चारो घड़ियां चार समय बताती है। नगरपालिका की इस कार्यशैली से यहां से स्थानीय नागरिकों में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि घंटाघर शोपीस बनकर रह गया है।
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इस चौराहे के निर्माण के लिए जो बजट निर्धारित था उससे अधिक पैसा लगने लगा। जिसके कारण ठेकेदार ने कार्य बंद कर दिया। इसके लिए बजट की व्यवस्था की जा रही है। जल्द ही घंटाघर चौराहे के अधूरे निर्माण को पूरा कर दिया जाएगा।
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शीला श्रीवास्तव, नगरपालिका अध्यक्ष।
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