आश्रम प्रथमदेव सिद्धपीठ धाम बहिरादेव पर चल रहे 10 दिवसीय श्री अति रूद्र महायज्ञ के पांचवे दिन काशी से कथा वाचक मयंक ने सत्संग का महत्व बताया। कहा कि जब तक मनुष्य सत्संग नहीं करता है तब तक उसका ज्ञान अधूरा रहता है। सत्संग से ही मानव का ज्ञान बढ़ता है। परमात्मा से प्रेम जाग्रित होता है। भक्ति की प्रथम प्रकिया प्रारंभ हो जाती है। बाल व्यास प्रशान्त पाण्डेय ने प्रभु श्रीराम की सुन्दरता की व्याख्या की। बताया कि प्रभु इतने सुन्दर हैं की उनके भक्त उनकी सुन्दरता पर मोहित होते रहते हैं। खरदूषण भगवान की सुन्दरता को देखकर युद्ध न करने का विचार करने लगा था। अयोध्या से आए कथा वाचक बाल किशोर ने बताया कि जीव को अंहकार नहीं करना चाहिए। आचार्य कौशल पाण्डेय ने मंत्रो से आश्रम गूंज उठा। पं राधेश्याम, पं. पकंज शास्त्री, पंकज मिश्र, मुकेश पाण्डेय, सीताराम सिंह आदि थे।