लाटघाट। स्वच्छता अभियान में जिले की पिछड़ी हालत को देखकर पूरा प्रशासनिक अमला कमर कस कर मैदान में उतरा हुआ है। डीएम और सीडीओ की ओर से रोजाना दो-दो ब्लाकों का दौरा कर कर्मचारियों और सफाईकर्मियों से गावों में 25-25 शौचालय बनवाने को कहा जा रहा है। लेकिन जिला प्रशासन की इस मुहिम को हरैया ब्लॉक के में रामपुर देवारा में दो लाख की लागत से बना सार्वजनिक शौचालय मुंह चिढ़ा रहा है। 2008-09 में बने शौचालय की खिड़की और दरवाजे टूट चुके हैं। टोटिया तक गायब हैं। आसपास की ग्राम समाज की जमीन पर भी कब्जा किया जा रहा है, लेकिन किसी भी अधिकारी की नजर इधर नहीं है।
हरैया विकासखंड के रामपुर देवारा गांव में तत्कालीन प्रधान राम जनक सिंह और सेक्रेटरी राम प्रवेश सिंह ने वर्ष 2008-09 में ग्राम पंचायत की ओर से दो लाख की लागत से सार्वजनिक स्वच्छ शौचालय का निर्माण कराया गया था। छत पर पानी की टंकी लगवा कर टोटियां भी लगवाई गईं थी। शौचालय बनने के बाद से ही सफेद हाथी बनकर रह गया है। सारी सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी इसे प्रयोग में नहीं लाया जा सका। और तो और इसके खिड़की-दरवाजे भी टूट चुके हैं। टंकी की टोटी तक निकाल ली गई है। शौचालय के चारों तरफ गोबर, कूड़ी डालकर जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। शौचालय के सामने इतनी गंदगी है कि प्रवेश करना ही मुश्किल है। प्रधान कौशल्या देवी के प्रतिनिधि प्रभुनाथ सिंह पटेल ने बताया कि हमने कई बार यहां साफ-सफाई करानी चाही, लेकिन लोगों ने रोक रखा है। गांव में सफाईकर्मी का आना-जाना भी लगभग बंद है।
मामला संज्ञान में नहीं था। यदि ऐसा है तो शौचालय की मरम्मत कराई जाएगी। इसे ग्रामीणों के प्रयोग के लायक बनवाया जाएगा। कब्जा हटाकर अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
गुलाबचंद सोनकर, बीडीओ