आजमगढ़। आवास का निर्माण कराने से पहले विकास प्राधिकरण से नक्शा पास कराना आसान काम नहीं था। कर्मचारी खामियां दिखाकर अक्सर नक्शा रोक देते थे और लोगों को प्राधिकरण दफ्तर के चक्कर काटने पड़ता था। इस उत्पीड़न को रोकनेे के लिए शासन स्तर ने मानचित्र के आनलाइन स्वीकृति का नियम बनाया है लेकिन प्रक्रिया और जटिल हो गई है। नतीजतन छह माह में मात्र तीन नक्शे ही पास हुए हैं।
नगर क्षेत्र में आवास का निर्माण कराने से पहले किसी को भी एडीए से मानचित्र कराना पड़ता है। अगर जमीन आवासीय क्षेत्र में आती है तो एडीए मानक के अनुसार मानचित्र स्वीकृत कर देता है। पर यह काम इतना आसान नहीं है। अक्सर मानचित्र में कोई न कोई खामी दिखाकर उसे पास करने से रोक दिया जाता था और लोग उस त्रुटि को दूर कराने के लिए एडीए कार्यालय का चक्कर काटते रहते थे। इसे देखते हुए शासन ने मानचित्र की स्वीकृति का कार्य आनलाइन कर दिया ताकि लोगों कार्यालय का चक्कर न काटना पड़े। कोरोना महामारी के कारण लाक डाउन के दौरान मानचित्र पास नहीं हो रहे थे। अनलाक के बाद जुलाई माह से आनलाइन आवेदन होने लगे। आनलाइन की आवेदन की प्रक्रिया भी जटिल है। उसे समझने में विभाग में पंजीकृत मानचित्र बनाने वाले अभियंताओं को भी काफी समय लग गया। छह माह में कुल 54 मानचित्रों की स्वीकृति के लिए आवेदन किए गए, जिसमें तीन ही स्वीकृत हुए। सात मानचित्रों को आवासीय क्षेत्र में न होने के कारण निरस्त कर दिया गया। 36 नक्शों को कमियों के चलते रोक दिया गया है। सात मानचित्रों की साइट विजिट नहीं हुआ।
मानचित्र आनलाइन में आ रही अड़चन
आजमगढ़। आनलाइन आवेदन जमा करते समय आवेदनकर्ता या वास्तुविद की ओर से कुछ न कुछ कमी रह जाती है। कई बार तो तमाम तरह के अपनापत्ति प्रमाणपत्र जमा करने में दिक्कत होती है। जब सभी दस्तावेज अपलोड न हो साफ्टवेयर मानचित्र को स्वीकृति के लिए बढ़ाता ही नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि आवेदन करते समय सभी कागज दुरुस्त होने चाहिए। इसमें पूर्णता प्रमाणपत्र, कंपाउंडिग व नवीनीकरण के आवेदन का विकल्प ही नहीं है।
शुरुआत में कुछ दिनों तक समस्या थी लेकिन अब आवेदन जमा हो रहे हैं। यदि किसी को अब भी समस्या आ रही है तो उनसे आकर मिले। साफ्टवेयर कंपनी का प्रतिनिधि भी है। उससे भी हल कराएंगे। साफ्टवेयर से आपत्तियां ज्यादा लग रही हैं। इससे मानचित्र स्वीकृति में देरी हो रही है। रही बात बिल्डरों की तो वे कालोनी को विकास की आवश्यकता के मुताबिक तय जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
बैजनाथ, एडीए सचिव
- अंबुज राय