आजमगढ़। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा कि दिन रात सेवा करने वाले राजकीय चिकित्सकों अपमान, प्रताड़ना और गुलामी का शिकार बना दिया गया है। कर्तव्यनिष्ठा, कठोर परिश्रम और जीवन भर में अर्जित योग्यता का प्रोत्साहन देने के बजाए उन्हें उनके मौलिक अधिकारों से दर-किनार कर दिया गया है। ऐसे में सेवारत चिकित्सक हताश, निराश और कुंठित हैं। उन्होेंने चिकित्सकों को उनकी गरिमा के अनुरूप सम्मान दिलाने एवं उनके अधिकारों को बहाल करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अधिकारों से भी राज्य सरकार ने उन्हें वंचित कर दिया है। ऐसे में दशकों से सेवारत चिकित्सक हताश, निराश और कुंठित हैं। नए चिकित्सक नियमित राजकीय सेवा में आने से डर गए हैं। इसके चलते प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के मृत प्राय होने का खतरा बढ़ गया है। पटरी से उतरी चिकित्सा सेवाओं के लिए चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि विभाग में दोहरी-तिहरी अव्यवहारिक व मनमानी व्यवस्थाओं से चिकित्सा सेवा दिशाहीनता की ओर बढ़ रही हैं। ढाई लाख तक प्रतिमाह वेतन पर चिकित्सक बिडिंग के माध्यम से मात्र आठ घंटे के लिए नियुक्त किए जा रहे हैं। उनसे मेडिकोलीगल पोस्टमार्टम इत्यादि कार्य नहीं लेने का नियम भी किया गया है। जबकि लोक सेवा आयोग से चयनित नवनियुक्त चिकित्साधिकारियों को मात्र 60 से 70 हजार प्रतिमाह वेतन दिया जाता है और उनसे दिन रात मेडिको लीगल कार्य सहित सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संपादन में कार्य लिए जाते हैं। इस मौके पर अध्यक्ष डा. विनय कुमार सिंह यादव, सचिव डा. राजनाथ, उपाध्यक्ष डा. पूनम कुमारी उपाध्यक्ष, वित्त सचिव डा. देवेंद्र सिंह, डा. वाईके राय, डा. ओम प्रकाश, डा. राज कुमार आदि उपस्थित थे।