मंडल के आजमगढ़, मऊ और बलिया जिले के करीब सात हजार लोग बीते कई वर्षों से न्याय के लिए मंडलायुक्त कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन इन्हें न्याय के बदले सिर्फ तारीखें मिल रही हैं। लंबित मुकदमों में करीब दो हजार ग्राम समाज की जमीन पर हुए अतिक्रमण से जुड़े मुद्दे हैं।
मंडलायुक्त कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों को मुताबिक जमीन से जुड़े करीब सात हजार मुकदमे बीते तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। इसमें आजमगढ़ जिले के 3452, मऊ की 1745 और बलिया जिले का 1803 मामले शामिल हैं। लंबित इन मुकदमों में दो हजार ऐसे मामले हैं जो ग्राम समाज की जमीन से जुड़े हुए हैं। इसमें आजमगढ़ जिले में कुल 845, मऊ जिले में 336 और बलिया जिले का कुल 819 मुकदमा शामिल है। सरकारी जमीनों से जुड़े ज्यादातर मामलों में लोगों ने अभिलेखों में हेराफेरी करके जमीन को अपने नाम करा लिया है। ज्यादातर मामले में चकबंदी विभाग के रिकार्ड में हेराफेरी की गई हैं। ऐसे मामलों में संबंधित तहसील से राजस्वकर्मियों और चकबंदी विभाग के अधिकारियों की तरफ से जमीन के विषय में अपनी रिपोर्ट दी गई है कि इसे खारिज करना है। बावजूद इसके मामला लंबित है। क्योंकि अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान किन्हीं कारणों से इसमें लंबी तारीख पड़ जाती हैं।
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लंबित रहने पर फटकार लग चुकी है
आजमगढ़। बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन से जुड़े मुकदमों का निस्तारण न होने से जहां न्यायालयों पर बोझ बढ़ रहा है। वहीं फैसलों को लेकर आमजन का विश्वास खत्म हो रहा है। राजस्व परिषद के चेयरमैन ने करीब एक माह पूर्व समीक्षा के दौरान अधिक मामले लंबित पाए जाने पर डीएम और कमिश्नर को फटकार लगाते हुए ऐसे मामलों का जल्द से जल्द निस्तारण का निर्देश दिया है।
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कोट
मंडल के तीनों जिलों में सात हजार से अधिक मुकदमा तीन वर्ष से पहले का है। इसमें दो हजार के लगभग मामले सरकारी जमीन से जुड़ा हुआ है। अदालत नियमित न चलने की वजह से ऐसे मामलों के निस्तारण में देरी हो रही है। वादों के निस्तारण और नियमित अदालत चलाने के लिए बार काउंसिल को पत्र लिखा जाएगा।
- के रविंद्र नायक, मंडलायुक्त