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बेगुनाहों को फंसाने वालों को हो जेल, तब होगा इंसाफ 17-55-04

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आजमगढ़ । बटला हाउस एनकाउंटर के नौ वर्ष गुजर जाने के बाद भी न्यायिक जांच नहीं हो सकी। अगर यह जांच हो जाती तो बहुत से चेहरे बेनकाब हो जाते। इंसाफ तो तब होगा जब इनको फंसाने वाले जेल में होंगे। उक्त बातें एसोसिएशन फॉर वेलफेयर मेडिकल एजुकेशनल एंड लिगल असिस्टेंस (ओमेला) के अध्यक्ष डा. जावेद अख्तर ने मंगलवार को मोहल्ला बाजबहादुर स्थित अपने आवास पर प्रेस प्रतिनिधियों से कही। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट न्यायिक जांच कराने से मना कर चुकी है। रीविव पेटीशन ही एक गुंजाइश थी, अब वह भी दाखिल नहीं किया जा सकता है। ओमेला सामाजिक संस्था हैदराबाद, दिल्ली और जयपुर में जमीयत-ए-ओलमा-ए- हिंद के साथ संयुक्त रुप से मुकदमा लड़ रही है। मुझे कोर्ट पर विश्वास है कि बेदाग रिहा कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने से इंकार करना आश्चर्यजनक बात है। इस मौके पर डा. कमालुद्दीन, डा. जावेद अली खान, मोहम्मद मोअज्जम, डा. फखरे आलम आदि उपस्थित रहे।
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