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जड़ से खत्म नहीं होता शुगर, सिर्फ कर सकते नियंत्रित : डॉ. परवेज

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आजमगढ़। विश्व मधुमेह दिवस 14 नवंबर पर बुधवार को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग व अमर उजाला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें मधुमेह से होने वाले नुकसान व बचाव के उपायों पर चर्चा की गई। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे एडिशनल सीएमओ डॉ. परवेज अख्तर ने कहा कि मधुमेह रोग एक ऐसी बीमारी है जो एक बार जिसे हो गई तो वह कभी जड़ से खत्म नहीं होती। इसे सिर्फ दवाओं, योग व दिनचर्या में परिवर्तन कर नियंत्रित किया जा सकता है। शुगर होने के बाद इंसुलिन की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है। इस पर नियंत्रण न करने पर तमाम तरह की परेशानी होती है। इससे बचने के लिए भोर में चार बजे से आठ बजे के बीच 20 से 30 मिनट टहलने की आदत हम सभी को डालनी होगी। टहलने से शुगर के साथ ही बीपी भी नियंत्रित रहता है। इसके अलावा अपनी दिनचर्या व खान पान में भी बदलाव लाना जरूरी है। आज हम मेहनत का काम काफी कर करते है। दिन भर कुर्सी पर बैठे रहते है। जिसके चलते ही यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। कुर्सी पर बैठ कर काम करने वालों को हर आधे घंटे पर एक-दो मिनट के लिए ही सही उठ कर टहल जरूर लेना चाहिए। शुगर होने पर आदमी चिड़चिड़ा हो जाता है और अवसाद से ग्रस्त हो जाता है। पूर्वांचल विकास आंदोलन के प्रवीण सिंह ने कहा कि हमारी जीवन शैली ही इस रोग को बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है। इसलिए हमें अपनी जीवन शैली में परिवर्तन लाना होगा। राजकीय पालीटेक्निक कालेज के शिक्षक कुलभूषण सिंह ने कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि मिठाई देख कर ही डर लगने लगा है। सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि यदि कोई व्यक्ति डायबिटीक नहीं है तो लोग अचरज में पड़ जाते है। बच्चों में शुगर का कारण फिजिकल एक्टीविटीज का स्कूलों में न कराया जाना है। पढ़ाई के साथ ही खेलकूद अत्यंत जरूरी है। संगोष्ठी को रेडक्रास सोसाइटी के कल्पनाथ सिंह, उमेश सिंह, बृजेश मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मनीष तिवारी, विनीत सिंह रीशू, प्रभात सिंह, सिद्धनाथ सिंह, रवि कुमार, सुनेत राय, सत्यपाल चौहान समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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डायबिटीज जांच को लेकर लगा नि:शुल्क शिविर
आजमगढ़। विश्व मधुमेह दिवस पर पैनेसिया हेल्थ सेंटर पर बुधवार को नि:शुल्क शुगर जांच शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान 150 से अधिक लोगों की नि:शुल्क जांच कर उन्हें आवश्यक सलाह दी गई। सेंटर के संचालक डॉ. विजय कुमार यादव ने कहा कि डायबिटीज तीन प्रकार की होती है। टाइप-1 डायबिटीज प्राय: बच्चों में होती है, अन्य लोग भी इसकी चपेट में आते है। इसमें इंसूलिन की कमी होती है। टाइप-2 डायबिटीज सबसे ज्यादा लोगों में पायी जा रही है। यह प्राय: व्यस्कों में 30-35 की आयु में होती है लेकिन वर्तमान समय में यह 15-30 आयु वर्ग में ही होने लगी है। इसमें इंसुलिन की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। टांइप-3 डायबिटीज गेस्टेशनल डायबिटीज है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को होता है।
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