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एक यूनिट रक्त किसी की दुनिया में ला सकता है उजाला

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आजमगढ़। आज भले मनुष्य मंगल पर पहुंच चुका हो पर रक्त का कोई विकल्प नहीं बन सका है। लेकिन विकास के इस दौर में आज भी रक्तदान को लेकर एक झिझक की चादर फैली है। ऐसे में कई लोग सही समय पर रक्त न मिलने की कारण असमय ही लोग काल के गाल में समा जाते हैं। हालांकि कुछ रक्तदान के लिए लोग आगे तो आ रहे हैं, लेकिन जिस तरह जागरूकता की जरूरत है वो अभी नहीं है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन की माने तो भारत में हर साल लगभग एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत होती है, लेकिन उपलब्धता सिर्फ 75 लाख यूनिट की हो पाती है। सबसे बड़ी विडंबना ये है कि पैसे देने के बावजूद भी सही समय पर रक्त नहीं मिल पाता और व्यक्ति की असमय मौत हो जाती है। इस वर्ष भी 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर सपूतों की याद में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। ऐसे में आपके पास मौका है रक्तदान जैसा महादान कर किसी की जान बचाने का। लोगों ने रक्तदान के लिए पंजीकरण कराना भी शुरू कर दिया है। आप सोच रहे हैं....झिझक छोड़िए और रक्तदान करिए।
रक्तदान हर वो व्यक्ति कर सकता है, जिसकी उम्र 16 से 60 साल के बीच हो और वजन 45 किग्रा से अधिक हो साथ ही एचआईवी, हेपेटाइटिस बी जैसी बीमारी न हो। रक्त की पूर्ति शरीर 24 घंटे के अंदर कर लेता है। प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति तीन माह में एक बार रक्तदान कर सकता है। कई जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए महादान में भाग लीजिए। क्योंकि एक यूनिट रक्बतदान कर आप चार लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं। गत वर्ष लगे शिविर में 150 से ज्यादा लोगों ने रक्तदान किया था। इससे लगभग 600 लोगों की जान बचाई जा सकी।
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रक्तदान से बड़ा पुण्य कोई नहीं है। रक्त के अभाव में बहुत से मरीजों की मौत हो जाती है। जबकि एक यूनिट रक्त का दान करने से आपके शरीर को कोई हानि नहीं पहुंचती है। कुछ ही दिनों में शरीर में फिर उतना रक्त बन जाता है। इस रक्त से किसी की जिंदगी बच सकती है। इसलिए मेरी सबसे अपील है कि यह महत्वपूर्ण अवसर आपके पास आया है। इसे हाथ से न जाने दें और रक्तदान कर पुण्य के भागी बने।
- चंद्र भूषण सिंह, जिलाधिकारी।
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देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले देश के सपूतों के लिए रक्तदान करना गौरव की बात है। क्योंकि अपने देश के जवानों के कारण ही हम अपने घरों में चैन से रह पाते हैं। हम और हमारा संगठन हमेशा इस तरह के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है। हमारे संगठन का तो नारा ही है %एक घंटा राष्ट्र को एक मुठ्ठी समाज को%। हमारी जनपद के अन्य लोगों से भी अपील है कि वह इस पुण्य के काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
- हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, प्रदेश उपाध्यक्ष भारत रक्षा दल।
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रक्तदान एक पुनीत कार्य है, एक व्यक्ति एक यूनिट रक्त देकर चार लोगों की जिंदगी बचा सकता है। 18 से 60 वर्ष तक का कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से किसी की जिंदगी ही नहीं बचती बल्कि इससे रक्तदान करने वाले व्यक्ति को भी कई फायदा होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। इसलिए लोगों से अपील है कि वह रक्तदान में हिस्सा लें और पुण्य के भागी बनें।
डा. श्रीकांत तिवारी, मुख्य चिकित्साधिकारी।
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रक्तदान की खुशी बयां करना मुश्किल
20 साल पहले मेरे परिचित निसार नाम के युवक को पीलिया हुआ था। झोलाछाप की दवा से उसकी हालत बिगड़ गई थी। उसे बीएचयू में भर्ती कराया गया था। मैंने उसे खून दिया था, लेकिन देर होने से उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसके बाद से मैं 11 बार रक्तदान कर चुका हूं। रक्तदान के बाद जो खुशी मिलती है उसे बयां नहीं किया जा सकता है। इस बार भी रक्तदान करूंगा।
हरेंद्र निषाद, नामित सभासद पालिका परिषद आजगढ़

रक्तदान को ये आए आगे
आशीष निवासी देवगांव, संतोष श्रीवास्तव निवासी चौक, मणिक बरनवाल निवासी सरायमोहन ठेकमा, गयाचंद यादव निवासी एकडंगी, प्रकाश मंडल निवासी परशुरामपुर और विपिन मौर्या निवासी जयरामपुर, सिधारी।
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