दो दिनों से स्थिर चल रहे घाघरा नदी के जलस्तर में मंगलवार को एकबार फिर से बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नदी का जलस्तर बढ़ता देख ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ गई है। संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी लगने से ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ गई है।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तरी सीमा से होकर गुजरने वाली घाघरा एक बार तबाही मचाने को आतुर दिख रही है। विगत दो दिनों तक स्थिर रहने के बाद मंगलवार को फिर से घाघरा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी देखने को मिली। सोमवार की शाम चार बजे नदी का जलस्तर बदरहुंआ गेज पर 71.96 मीटर था जो मंगलवार की शाम चार बजे 72.02 मीटर पर पहुंच गया।
जो खतरा बिंदु 71.68 मीटर से 34 सेमी ऊपर है। वहीं डिघिया गेज पर नदी का जलस्तर सोमवार की शाम चार बजे 71.10 मीटर था जो मंगलवार की शाम चार 71.14 मीटर पर पहुंच गया। डिघिया गेज पर नदी खतरा बिंदु 70.40 मीटर से 74 सेमी ऊपर बह रही है। बताते चलें कि घाघरा नदी सगड़ी तहसील क्षेत्र के तीनों ब्लाकों महराजगंज, हरैया और अजमतगढ़ को प्रभावित करती है। इन ब्लाकों में हरैया ब्लाक सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।
प्रशासन द्वारा बाढ़ से निपटने के लिए 10 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। जलस्तर बढ़ने के साथ ही देवारा खास राजा के मुराली का पुरा में खेती योग्य भूमि का कटान तेज हो गया है। लगभग साठ बीघा कृषि योग्य भूमि अब तक घाघरा की धारा में विलीन हो चुकी है।
चक्की गांव चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। वहीं क्षेत्र के 15 गांवों के संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी चढ़ने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे जहां स्कूली बच्चों की पढ़ाई बाधित है वहीं पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भारी पड़ रहा है। प्रशासन ने क्षेत्र में सात नाव लगाई हैं जो आबादी को देखते हुए नाकाफी साबित हो रही हैं। बाढ़ चौकियों से कर्मचारी नदारत हैं। बाढ़ खंड के अधिकारी मौन साधे हैं। वहीं नदी के बढ़ते जलस्तर को देख ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई है।