आजमगढ़। औद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार की तरह से चलाई जा रही परियोजना के तहत काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान ने बुधवार को मार्टीनगंज तहसील अंतर्गत ठेकमा ब्लाक के सराय मोहन में किसानों को जैव उर्वरक से होने वाले लाभ और उसे बनाने की विधि की जानकारी दी गई। परियोजना के संचालन डा. जपी वर्मा और सह संचालक डा. पीसी अभिलाष, गोबर्धन कुमार चौहान, दुर्गेश कुमार जायसवाल, आनंद कुमार ने जैविक खाद से होने वाले लाभ और रासायनिक खादों से के उपयोग से होने वाली वाली जानकारियों के बारे में विस्तार से बताते हुए इसमे बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को चाहिए कि वह सर्व प्रथम अपने खेत की मिट्टी की जांच करा लें। इससे उनके खेत की मिट्टी की गुणवत्ता की जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने किसानों को जैव खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया इसके साथ ही कीटनाशक घोल का पैकट दिया। उन्होंने बताया कि अगर जैव उर्वरक का किसान प्रयोग करें तो उनके उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत वृद्धि होने के साथ ही उसकी गुणवत्ता में वृद्धि होगी। जैव उर्वरक का प्रयोग गेहूं, के अलाव धान, चना, मटर, मक्का, सरसों और सब्जियों में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि रासायनिक खाद का उपयोग करने से कई प्रकार के रोग से लोग ग्रस्त हो सकते है। जैव उर्वरक का प्रयोग पूरी तरह से स्वस्थ्य रखता है। इस अवसर पर किसान खिलाड़ी पासवान, रामसुध, सोनी, मुरली सहित लगभग डेढ़ सौ किसान उपस्थित रहे।