प्रदेश सरकार की ओर से उद्योग धंधे को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन समय से ऋण नहीं मिलने के कारण मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। आवेदन करने से लेकर बैंक तक की प्रक्रिया पूरी करने के बाद बैंकों की ओर से हीलाहवाली किए जाने के कारण समय ऋण स्वीकृत नहीं हो पाते हैं जिसके चलते कई आवेदक विचार ही बदल देते हैं। मौजूदा समय में जिला उद्योग केंद्र की ओर से स्वरोजगार के लिए तीन योजनाएं चलाई जा रही हैं। नोटबंदी ने इन योजनाओं की स्वीकृति की राह में रोड़ा अटकाया है। अभी तक मात्र एक योजना में बैंक से 25 फाइलों को स्वीकृत मिली है जबकि 64 फाइलें बैंकों में स्वीकृति के लिए लंबित पड़ी हैं।
जनपद के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में जिला उद्योग केंद्र का महत्वपूर्ण योगदान होता है। जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से युवा स्वरोजगार को करते हैं। वर्तमान में जिला उद्योग केंद्र की ओर से तीन योजना प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, समाजवादी युवा स्वरोजगार योजना और समाजवादी ब्याज उपादान योजना का संचालन किया जा रहा है। विभाग की मानें में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत इस वर्ष जनपद को 58 का लक्ष्य मिला था। इसके सापेक्ष 108 लोगों ने आवेदन किया।
जिसमें से 58 लोगों की फाइल स्वीकृति के लिए बैंकों को भेजी गई है। वहीं समाजवादी युवा स्वरोजगार योजना में जनपद का लक्ष्य 44 था। आवेदित फाइलों में से 44 लोगों की फाइल को जांचकर बैंक में भेजा गया जिसमें से 25 फाइलें स्वीकृति हो चुकी हैं। बाकी की फाइलें बैंक में स्वीकृति का इंतजार कर रही हैं। वहीं समाजवादी ब्याज उपादान योजना का लक्ष्य अनलिमिटेड है। इनमें से आठ फाइलें बैंकों में स्वीकृति के लिए भेजी गई हैं। लेकिन अभी तक एक भी फाइल को स्वीकृति नहीं मिली है। इस प्रकार अगर देखें तो सिर्फ एक योजना को छोड़ दे तो बाकी दो योजनाओं में एक भी आवेदन को स्वीकृति नहीं मिली है।