आजमगढ़। काफी प्रयास के बाद अल्पसंख्यक विभाग ने जनपद में 2417 वक्फ संपत्तियों को खोजा है। सत्यापन के लिए इनकी जानकारी तहसीलों में भेजी गई है। इससे पता चलेगा कि वक्फ संपत्तियां राजस्व विभाग के अभिलेखों में हैं या फिर सरकारी जमीन पर। उधर सभी तहसीलों में वक्फ संपत्तियों के सत्यापन का काम शुरू हो गया है। केंद्र में वक्फ संशोधन बिल आने के बाद से ही जिलों में वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा खंगाला जा रहा है। चूंकि 1987 से पहले मऊ जनपद आजमगढ़ का ही हिस्सा हुआ करती थी। लेकिन बाद में यह अलग जनपद बन गया। उस समय दोनों जनपदों को मिलाकर कुल छह तहसीलें होती थीं। वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा इकट्ठा करने के लिए जब शासन से आदेश हुआ तो कर्मचारियों को जानकारी जुटाने में काफी परेशानी हुई। क्योंकि, दोनों जनपदों की वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा अभी अलग नहीं हुआ था। आजमगढ़ और मऊ के वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा अलग करने के लिए अल्पसंख्यक विभाग को मदरसा के शिक्षकों को लगाना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद उस समय की चार तहसीलों सदर, सगड़ी, फूलपुर और लालगंज में 2417 वक्फ संपत्तियां मिलीं। जबकि इस समय जिले में आठ तहसीलें हो गई हैं। इन संपत्तियों में शिया समुदाय की 188 जबकि सुन्नी समुदाय की 2229 वक्फ संपत्तियां शामिल हैं।
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तहसीलवार वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा
तहसील- शिया- सुन्नी
सदर- 64- 481
सगड़ी- 40- 671
फूलपुर- 62- 629
लालगंज- 22- 448
कुल- 188- 2229
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जिले में 2427 वक्फ संपत्तियां मिलीं हैं। इसमें शिया की 188 और सुन्नी की 2229 संपत्तियां हैं। तहसीलों से वक्फ संपत्तियों का सत्यापन कराया जा रहा है। अभी सत्यापन की फाइनल रिपोर्ट तहसीलों से नहीं आई है।
-वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी