अहरौला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर गरीब व्यक्ति के सिर पर छत देने का वादा करते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरूआत की। लेकिन यह इस योजना में भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हो गई है। हर जगह आवास के नाम पर सुविधा शुल्क मांगने के आरोप लग रहे हैं लेकिन कार्रवाई न होने से शिकायतकर्ताओं के भी हौसले पस्त हो गए हैं। वहीं कई पात्र लाभार्थी पैसे न देने के कारण इस योजना का लाभ पाने वंचित हो गए हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरूआत गरीबों के सिर पर छत मुहैया कराने के लिए की गई है। इस योजना के तहत जनपद में हजारों लोगों के आवास बन चुके हैं और आज भी हजारों की संख्या में आवास बनाए जा रहे हैं। लेेकिन इस योजना की सबसे बड़ी बात यह है कि यह योजना भी भ्रष्टाचार से नहीं बच सकी। विभागीय कर्मचारी लोगों का आवास के लिए सुविधा शुल्क मांगन से नहीं हिचक रहे हैं। यहां तक इस योजना में 25 हजार रुपये सुविधा शुल्क मांगने के आरोप पूर्व परियोजना निदेशक डीडी शुक्ला पर भी लगे थे। जिसमें तत्कालीन सीडीओ अभिषेक कुमार ने उनके खिलाफ शासन को रिपोर्ट भी भेजी थी। लेकिन इस मामले में उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विकास खंड अहरौला में 94 ग्राम सभाएं आती हैं। ग्राम सभाओं के अंदर ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास देने के नाम पर ग्राम प्रधान और सचिव जमकर लाभार्थियों का शोषण कर रहे हैं। पैसे लेकर उनके द्वारा मानक के विपरीत भी अनेक आवास दिए गए हैं। हालांकि लाभार्थी दबी जुबान यह तो बता रहे हैं इसमें 20 से 25000 रुपये सुविधा शुल्क के नाम पर देना पड़ रहा है। ना देने पर आवास कैंसिल और किस्त न आने की बात कही जाती है। बहुत से लाभार्थियों से 10 से 15000 एडवांस में लिया गया है। वहीं अपने चहेतों को भी प्रधानों द्वारा ब्लॉक कर्मियों की मिलीभगत से एक से दो आवास दिए गए हैं। विकासखंड के सुल्तानीपुर गांव में बृजेश राजभर और सूरत राजभर को आवास आवंटित किए गए हैं उसके बदले में ग्राम प्रधान द्वारा शुरुआती दौर में 3000, इसके बाद किश्त आने पर लगभग 20000 रुपये लिए गए हैं। इसी प्रकार विकासखंड के पक्खनपुर गांव में भारी अनियमितता है जिसकी शिकायत लगभग दो दर्जन ग्रामीणों द्वारा एसडीएम, सीडीओ, जिलाधिकारी और सीएम हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराकर जांच की मांग की गई है। विकास खंड के बनहरमय चक गजड़ी में भी तमाम शिकायतें हैं। वहां भी किसी प्रकार की अधिकारिक कार्रवाई नहीं हो रही है। पखनपुर के ग्रामीणों का कहना है अभी तक इसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई अगर इसकी जांच सीडीओ और जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी के द्वारा कराई जाए तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है एक-दो दिन के बाद वह पुन: जिलाधिकारी से मिलकर जांच की मांग करेंगे। यहां मानक के विपरीत अपात्र लोगों को दो-दो आवास दिए गए हैं और बदले में मोटी रकम वसूली गई है।
यह सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है इसलिए इसमें जो भी शिकायत हम तक पहुंचती है उस पर जरूर जांचकर कार्रवाई होती है। अगर कहीं इस तरह की शिकायत मिलती है उसकी जांच कराई जाएगी। अगर कोई इसमें दोषी मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विनोद कुमार यादव, खंड विकास अधिकारी, अहरौला।