आजमगढ़। प्राथमिक शिक्षा के गिरते स्तर को ऊपर उठाने के लिए सरकार द्वारा दो वर्षों में काफी प्रयास किए गए। इसके लिए सरकार ने जो बजट अनुमोदित किया उसे विभाग को उपलब्ध कराया। विभाग ने सरकार से मिले धन का पूरा उपयोग किया लेकिन वह प्राथमिक शिक्षा के गिरते स्तर और प्राथमिक विद्यालयों में घटती छात्र संख्या को बढ़ाने में नाकाम रहा।
सरकार द्वारा प्रदेश में गिरते प्राथमिक विद्यालयों के शैक्षिक स्तर और घटती छात्रों की संख्या को ऊपर उठाने के लिए काफी प्रयास किया गया। सरकार ने इस दिशा में काफी पैसा भी खर्च किया लेकिन नतीजा वहीं ढ़ाक के तीन पात। क्योंकि न तो छात्रों का शैक्षिक स्तर ही ऊपर उठ सका और ना ही प्राथमिक विद्यालयों से छात्रों की घटती संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकी। जनपद में अगर प्राथमिक शिक्षा पर दो वर्षों में सरकार द्वारा व्यय किए गए रूपयों का आंकड़ा देखें तो वर्ष 2015-16 में प्राथमिक शिक्षा के लिए 3819.50 लाख रुपये का बजट अनुमोदित हुआ। विभाग ने पूरे पैसे को व्यय भी कर दिया। वहीं 2017-18 में सरकार ने प्राथमिक शिक्षा के लिए 3819.50 लाख रुपये का बजट अनुमोदित किया। जिसमें से विभाग ने 3719.50 लाख रुपये व्यय किए। इन बजट में राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 85.34 लाख और केंद्र सरकार ने 158.49 लाख रुपये दिए। इन पैसों को छात्रों को ड्रेस, किताब, मध्याह्न भोजन, दूध, फल आदि मुहैया कराया गया। पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी प्राथमिक विद्यालयों में स्थिति जस की तस है।