लाटघाट। घाघरा के कटान की जद में आए सगड़ी तहसील के चक्की गांव को बचाने की कवायद शुरू हो गई है। गांव को बचाने के लिए ठोकर का निर्माण शुरू होने से ग्रामीणों में हर्ष व्याप्त है। उन्हें आशा है कि यह ठोकर उनके घर को घाघरा में समाने से बचाएगा।
बताते चलें कि सगड़ी तहसील के उत्तरी सीमा से होकर गुजरने वाली घाघरा प्रतिवर्ष इस क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बनकर आती है। नदी वापस अपने पेटे में जाती है तब तक इतनी तबाही मचा देती है कि देवारावासियों को इससे उबरने में पूरा साल निकल जाता है। जब तक वह इससे उबरते हैं तब तक घाघरा एक बार फिर से तबाही मचाने के लिए उनके दरवाजे पर खड़ी नजर आती है। वर्तमान में चक्की और देचारा खास राजा गांव के मुराली का पुरवा घाघरा की कटान के मुहाने पर खड़ा है। काफी दिनों से गांववासी गांव को बचाने के लिए ठोकर निर्माण की मांग कर रहे थे। लेकिन प्रशासन कानों में तेल डालकर सो रहा था।
चक्की गांव में कुल 150 घर की आबादी थी। 2003 से कटते-कटते वर्तमान में 90 घर बचे हैं। इस बार प्रशासन द्वारा चक्की गांव को बचाने की पहल की गई है। गांव को बचाने के लिए चार ठोकर बनाने का कार्य शुरू हो चुका है। मनरेगा के तहत तेजी से ठोकर बनाने का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य से ग्रामीणों में हर्ष व्याप्त है। एसडीएम सगड़ी रवि रंजन ने कहा कि हर हालत में बाढ़ आने से पूर्व ठोकर का निर्माण पूरा हो जाना चाहिए। वहीं बाढ़ खंड के सहायक अभियंता डीसी श्रीवास्तव का कहना है कि बाढ़ से गांव की सुरक्षा करना पहली प्राथमिकता है।