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देर से बोई जाने वाली मुख्य प्रजातियों की जानकारी दी

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आजमगढ़। किसान पाठशाला के द्वितीय चरण के पहले दिन रबी की प्रमुख फसलों कि देर से बोई जाने वाली मुख्य प्रजातियों और अधिक उत्पादन के लिए कृषि वानिकी, पारदर्शी किसान सेवा मोबाइल एप, डीबीटी, कीट रोग नियंत्रण योजना अंतर्गत अन्य सुविधाओं, सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली पर किसानों को प्रशिक्षित किया गया। 144 ग्राम पंचायतों में हुई पाठशाला में 5904 किसानों ने विभागीय योजनाओं का लाभ लिया।
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किसानों को बताया गया कि जिन किसानों ने अभी गेहूं की बुवाई नहीं की है वो देर से बुवाई के लिए उपर्युक्त प्रजातियां जैसे डीवीडब्ल्यू 16, बीबीडब्ल्यू 90, एचडी 3059, एचडी 2985 का चयन करें। बीज की मात्रा 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से गेहूं की लाइन से बुवाई करें। बुवाई के पूर्व ट्राइकोडर्मा 4 से 5 ग्राम थीरम 2-5 ग्राम या 2 ग्राम कार्बेंडाजिम से बीज का शोधन अवश्य करें। बुवाई के 20 से 25 दिन के अंदर ताज मूल अवस्था पर पहली सिंचाई अनिवार्य रूप से कर दें। मिट्टी में जिंक की मिल रही है। खड़ी फसल में 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 25 किलोग्राम यूरिया का घोल बनाकर 800 से 1000 लीटर पानी में छिड़काव करें। किसानों को सलाह दी गई कि मसूर में फूल आने से पहले सिंचाई करें। इसी प्रकार मटर सरसों में फूल आते समय सिंचाई करें। मटर में फली छेदक कीट की समस्या रहती है, इसके निदान के लिए, नपीवी 250, लई का 200 से 300 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रयोग कर लाभ उठा सकते हैं।
दूसरे सत्र में किसानों को बताया गया कि गांव सभा की भूमि खेत की मेड़ों सड़कों के किनारे विभिन्न प्रजातियों के पेड़ों को लगाकर ईंधन, व इमारती लकड़ी प्राप्त की जा सकती है। पारदर्शी किसान सेवा एप पर घर बैठे कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते है, वह अपना पंजीकरण स्वयं कर सकते है। आधार नंबर मोबाइल नंबर ऐड कर सकते हैं। किसान ब्लाकों के राजकीय कृषि बीज भंडार अथवा जनपद कार्यालय में जाकर निशुल्क पंजीकरण कृषि विभाग की वेबसाइट पर कर सकते हैं।
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