लालगंज। देवगांव स्थित जामिया फैजे आम परिसर में गुरुवार की रात वार्षिक जलसे का आयोजन किया गया। जिसमें मौलाना सलमान अहमद बिजनौरी ने शिरकत जलसे को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के समय अंग्रेजों ने इस्लाम धर्मानुयायियों को बहुत प्रताड़ित किया था। आज भी इसके अनुयायियों पर बड़ी चुनौती है। जिसकी कोशिश अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक की जा रही है और यह लड़ाई खुले तौर पर लड़ी जा रही है। कुछ लोगों का प्रयास यह है कि किसी भी प्रकार इस्लामी शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए जो यह नहीं जानते कि इस्लाम अमन का पैगाम देता है। मदरसों में एक मसला है कि हमारे विद्वानों ने इसे सरकारों के आश्रित न रहकर यह व्यवस्था पसंद की थी कि यह सार्वजनिक चंदे से चलेंगे। मदरसों के लिए स्थायी आय के स्रोत भले ही नहीं हैं लेकिन सरकारें समाप्त हो जाया करती हैं चंदा देने वाले समाप्त नहीं होते। उन्होंने कहा कि मदरसों के महत्व को समझने की जरूरत है। शिक्षा ही ज्ञान का भंडार है। आज शिक्षा का पहलू कमजोर हो रहा है। शिक्षाविद इस पर नए सिरे से रणनीति तैयार करें जो राष्ट्र की मजबूती के लिए परम आवश्यक है। इसके लिए सभी पढने का स्वभाव बनाएं। मौलाना सुफियान अहमद ने कहा कि मुसलमानों को भी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे पूर्व जलसे का आरंभ कारी शमीम अहमद के कुरान पाक के पाठ के साथ हुआ। इसके बाद कटौरी, बैरीडीह, लालगंज, देवगांव, बनारस, कंजहित, अंबेडकर नगर, मदारपुर, खुंदनपुर, संत कबीर नगर, मुहम्मदपुर आदि के जामिया के पढ़े सैकड़ों हाफिजों की मौलाना सलमान अहमद, मौलाना अब्दुल रहीम और मौलाना सुफियान अहमद ने दस्तारबंदी की। संचालन मौलाना परवेज अहमद और अध्यक्षता मौलाना अब्दुल रहीम ने की। मौलाना हबीबुर्रहमान कासमी ने सभी आभार व्यक्त किया।