अहरौला। दो वर्ष पहले हसनाडीह उच्च प्राथमिक विद्यालय का गेट गिरने से दो बच्चों की मौत की जांच करने मानवाधिकार आयोग की टीम सोमवार को जनपद पहुंची। मौके पर जाकर तत्कालीन प्राचार्य और पुलिस से पूरे मामले की जानकारी ली। तत्कालीन प्रधानाध्यापक, एसओ और एसडीएम के साथ परिवार से मामले की जानकारी ली। टीम को प्रथम दृष्टया निर्माण कराने वाले प्रभारी दोषी मिले हैं।
29 मई 2016 की शाम 6:30 बजे स्कूल का गेट गिरने से गांव की शिफा (5) पुत्री अकील अहमद, शोएब (6) पुत्र अल्ताफ की मौत हो गई थी। रात ही में पुलिस और प्रशासनिक तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने परिजनों से समझौतानामा पर दस्तखत करा लिया था। थाने में मात्र इत्तफाकिया दर्ज किया गया था। दो साल बाद मानवाधिकार की टीम सोमवार को घटना की जांच करने हसनाडीह गांव सोमवार शाम को पहुंची। आयोग के इशम सिंह और दीपक कुमार ने तत्कालीन प्रधानाध्यापक सुरेश पांडे को तलब किया। सुरेश पांडे ने बताया कि चहारदीवारी का निर्माण 2013 में प्रभारी अशोक कुमार चौबे ने कराया था। तीन साल बाद मैं प्रधानाध्यापक बनकर आया और घटना घट गई। पूर्व प्रधानाचार्य सुरेश पांडे ने मानक में अनदेखी की पुष्टि की। तत्कालीन अहरौला एसओ विजय प्रकाश यादव से भी घटना के जानकारी ली। मुकदमा क्यों पंजीकृत नहीं किया गया पूछा गया। निराश परिवार जब सड़क पर पहुंचा तो उन पर मुकदमा दर्ज क्यों किया गया। सदस्यों ने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। एसडीएम बूढ़नपुर इंद्रभान तिवारी से परिवार को अब तक क्या दिया गया जानकारी ली। एसडीएम बूढ़नपुर में बताया कि 12 साल के नीचे किसी की दुर्घटना में मौत होने पर कोई भी सुविधा को सरकार की ओर से नहीं दी जाती है। टीम ने खंड शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार गौतम से भवन निर्माण में मानक की बात पूछी। कहा कि किसी टेक्नीशियन को भवन निर्माण की जिम्मेदारी न देकर एक शिक्षक को क्यों दी गई। टीम पीड़ित परिवारों के घर भी पहुंची। शिफा के पिता अकील अहमद ने बताया कि लोगों ने दबाव बनाकर पंचनामे पर दस्तखत करा लिया। आरोपियों पर मुकदमा भी नहीं दर्ज किया। दूसरे दिन हम लोगों ने नाइंसाफी होने की बात कही तो पुलिस प्रशासन ने 31 लोगों को नामदज और सैकड़ों अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। टीम ने चहारदीवारी और मानक की बारीकी से जांच की। सभी संबंधितों को मंगलवार को सर्किट हाउस में सबूतों के साथ तलब किया। इशम सिंह ने बताया कि हम दो-तीन दिन यहां रह कर जांच करेंगे और सच्चाई तक पहुंचेंगे। प्रथम दृष्टया तो निर्माण कराने वाले प्रभारी दोषी नजर आते हैं। एसडीएम बूढ़नपुर इंद्रभान तिवारी, तहसीलदार अंबिका चौधरी, सीओ सगड़ी सुधाकर सिंह, सीओ बूढ़नपुर रामजन्मआदि थे।