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पुरानी पेंशन की बहाल होती तो शिक्षकों को मिलता फायदा

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आजमगढ़। प्रदेश सरकार ने गुरुवार को पेश किए बजट में शिक्षा पर भी ध्यान दिया है। सरकार ने सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए बजट का प्रावधान किया है। साथ ही सरकार ने संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए भी बजट का प्रावधान किया है। लेकिन शिक्षकों की मानें तो उनके लिए इस बजट में कुछ नहीं है। लेकिन शिक्षा के विकास में इस बजट से लाभ होगा। शिक्षक अरुण राय ने कहा कि सरकार के इस बजट से शिक्षा का विकास होगा। सैनिक स्कूलों की स्थापना से शिक्षा के स्तर में सुधार होगा। साथ ही बच्चों की शारीरिक क्षमता बढ़ेगी और उनमें देशप्रेम की भावना का विकास होगा। संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी है इसके विकास से हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। शिक्षिका प्रज्ञा राय ने कहा कि सरकार का शिक्षा के प्रति पेश किया गया बजट अच्छा है। शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए इसमें काफी कुछ है। लेकिन काफी दिनों से शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा पुरानी पेंशन के बहाली की मांग की जा रही है। अगर सरकार बजट में इसे शामिल करती तो शिक्षकों के लिए हितकर होता। शिक्षक आनंद कुमार उपाध्याय ने कहा कि सैनिक स्कूल खोलने की सरकार की जो योजना है वह बहुत ही अच्छी है। इसके शैक्षिक स्तर में सुधार होगा। संस्कृत विद्वालयों को जो अनुदान दिया गया है वह ठीक है लेकिन इनमें व्याप्त शैक्षणिक और वेतन विसंगतियों को दूर किया जाना चाहिए। शिक्षक विनय सिंह ने कहा कि सैनिक स्कूलों की स्थापना सरकार का बहुत अच्छा कदम है। इनके स्थापित होने से बच्चों में अनुशासन का विकास होगा। संस्कृत भाष सभी भाषाओं की जननी है। इसे बढ़ावा देने के साथ ही इससे पढ़ने वाले छात्रों के लिए रोजगार की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
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